आत्म चेतना के सफ़र की शुरुआत

आज की मुरली

आज मधुबन में चर्चा की शुरुआत इस बात से हुई की वानप्रस्थ का समय नजदीक आने वाला है तो अपने जितने भी पुराने बही खाते हैं, उन्हें बंद कर लो। वानप्रस्थ प्रज्ञा प्राप्त करने की अवस्था है। वह अवस्था जहाँ बोलने की आवश्यकता नही पड़ती। विचार व संकल्प शक्ति ही पर्याप्त होती है।

इस बात को हम कुछ गहराई में उतर कर देखें तो यह बड़ी गूढ़-गंभीर बात है। व्यक्ति को हमेशा इस तैयारी में रहना चाहिए कि कब आगे बढ़ने की, बाहर निकलने की, यात्रा की घड़ी आ जाए। ऐसे में यदि पुराने बही खाते खुले रहेंगे। पुराने हिसाब बाकी रहेंगे तो आगे की यात्रा सुगम नहीं हो सकती है। इस यात्रा को हम कई संदर्भों में ले सकते हैं। हर संदर्भ में यह व्यवहारिक और उचित जान पड़ेगा कि चलने से पहले पुराने सारे हिसाब चुकता कर लिया जाए।

हिसाब चुकता करने को लेकर गुरुश्री की बात सु-स्पष्ट है। यह एक ही तरीके से हो सकता है। अपनी भूलों के लिए क्षमा मांग कर और दूसरों की भूलों पर उनको क्षमा करके।

आत्म शुद्धि हेतु यह आवश्यक है की हमारा मन हमारी बुद्धि और हमारी वाणी विकार रहित हो। इसके लिए गुरुश्री सिर्फ एक सुगम रास्ते पर चलने हेतु निर्देशित करती हैं। वह रास्ता है सदैव परमात्मा के चिंतन का, उससे अपने संबंध को पहचानने का, उसकी प्राप्ति में अपने सभी विकारों को समर्पित कर देने का। ब्रह्मा बाबा इस बात की चेतावनी भी देते हैं कि यह रूद्र यज्ञ जब भी होगा तो इसमें विघ्न, बाधाएं अवश्य आयेंगी। परंतु समय के साथ सारे विघ्न समाप्त हो जाएंगे। लेकिन ऐसा तभी होगा, जब हम संशय को त्याग कर, पूर्ण विश्वास के साथ, शुभ इच्छाओं को मन में रखते हुए, आत्म उन्नति का प्रयास करेंगे। 

!!ओम शांति!!

----
प्रियदर्शी प्रतीक
15.06.2022

Comments

Popular posts from this blog

भीड़ चीखती और भीड़ चिल्लाती जाती

Budhha: Some thoughts on his Sculpture at Sanchi

Ecstasy of Blissfulness: Sadhguru