आज की मुरली 21.06.2022

आज चर्चा इस बात से शुरू हुई कि हमें यह ध्यान में रखना है कि यह संसार या जो कुछ भी हमें दिख रहा है वह नष्ट हो जाने वाला है। अतः हमें उसके लिए प्रयास करना है जो हमें आगे मिलेगा।
मुझे लगता है की यह बात बार-बार, अनेक प्रकार से उल्लेख करके, बाबा हमें यह जताना चाहते हैं कि हम किसी भी प्रकार का मोह किसी से भी ना रखें। इसे दूसरी तरह से देख सकते है। जैसे अगर किसी को यह विश्वास हो जाए कि यह जो कुछ भी संसार में दिखाई पड़ रहा है वह एक दिन नष्ट हो जाएगा। तो उसके मन से यह बात निकल जाएगी कि मैं यह बना लूं या वह बना लूं। मैं ऐसा महल बना लूं या मैं वैसा किला बना लूं। व्यक्ति वही करेगा जो उसके लिए जरूरी होगा और समाज के लिए शुभ होगा। उसके अंदर से भोग करने की वृत्ति नष्ट हो जाएगी।

गुरु श्री कहती हैं की हमें हद से बेहद की ओर चलना है । हमारी दृष्टि बेहद को समझने वाली होनी चाहिए।

आज इस बात को समझ कर मैंने अपनी मौसेरी बहन को समझाया। हमारी बात इस भाव को लेकर हुई कि क्या परमात्मा हमारे दुख तकलीफों को जानता समझता है या नहीं? हद को समझने में उदाहरण के तौर पर हम यह ले सकते हैं कि बच्चे के माता पिता एक दृष्टि में बच्चे के लिए उसके क्रिएटर या ब्रह्मा हुए। यह मोटे तौर पर बात हुई। जिससे हद को एक लिमिट की बात के तौर पर समझा जा सकता है। परंतु इस संसार के सभी जीव जंतुओं और मनुष्य का पिता वह परम शक्ति है जिसे शिव बाबा के तौर पर जानते हैं। यह बेहद का स्तर की बातें हुई। समझ को व्यापक करने पर बेहद को समझने की दृष्टि उत्पन्न होती है। मैंने उसे बताया की जैसे तुम अपने बच्चे के बारे में सब कुछ जानती और समझती हो परंतु फिर भी कई बातें ऐसी होती है जिन्हें बच्चा तुमसे ना बताएं तो तुम नहीं जान पाती नहीं समझ पाती और उस मामले में बच्चे की मदद नहीं कर पाती। ऐसे ही यह मानो कि वह परमपिता भले ही जानता हो कि हम उसके बच्चे हैं लेकिन वह हमारी समस्याओं को तब तक अच्छे तौर पर समझ नहीं पाएगा जब तक हम आगे बढ़कर उसको अपनी सारी बातें बता नहीं देते। तो अपने हद स्वरूप अर्थात आत्मा रूप को समझते हुए बेहद को अर्थात परमपिता परमेश्वर को समझने की दिशा में बढ़ाया गया कदम ही हद से बेहद को समझने का प्रयास होगा। ऐसा प्रयास और परमात्मा की याद ही जीवन में संतुष्टि और खुशियों के फूल खिलाती है।

!!ओम शांति!!

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प्रियदर्शी प्रतीक
21.06.2022

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