आज की मुरली 29.06.2022
आज की मुरली गुरुश्री ने सुनाई। आज की मुरली में मुख्य बात यह है कि बाबा कहते हैं तुम्हें परमात्मा का परिचय सब को देना है लेकिन किसी से बहुत बहस नहीं करनी है।
यह बात बिल्कुल सही लगती है क्योंकि यह विषय ऐसा नहीं है, जिसमें कुछ इस प्रकार से सिद्ध किया जा सके कि अगले व्यक्ति के पास आपकी बात ना मानने की कोई गुंजाइश ही ना बचे। आध्यात्मिकता का क्षेत्र साइकॉलजी के विषय की तरह है। इसकी कोई निश्चित परिभाषा या सीमा नहीं है। हर दिन नया है, हर वक्त नई पहेली है। इसीलिए यह बात एकदम सही है कि इस विषय पर किसी से बहुत ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए। अब बहस करके यह बात किसी को नहीं मनवा सकते हैं। जिसको समझ में आ जाएगा, जो महसूस कर लेगा वह मान भी जाएगा। तो कर्तव्य सिर्फ इतना सा है की परिचय दे देना है। रास्ता दिखा देना है। चलना ना चलना उसके हाथ।
दूसरी महत्वपूर्ण बात जो बाबा कहते हैं। वह यह है कि जब आप ज्ञान के मार्ग पर चलते हैं तो माया कई प्रकार से आप को घेरने का प्रयास करती है। उससे बचने का तरीका यह है कि अपने आप को याद और सेवा में लगा देना। गुरु श्री ने बताया है की याद का अर्थ परमात्मा को सदैव अपने ध्यान में रखना और अपने हर कार्य को उस को समर्पित करते हुए चलना है। और सेवा का अर्थ ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने की दिशा में किया गया प्रयत्न है। मुझे लगता है यह सही बात है। जब आप अपने हर कार्य को समर्पण के भाव से करना शुरू करते हैं। तो कहीं ना कहीं मन में यह विवेक उत्पन्न होता है की क्या सही है, क्या गलत। यह विवेक हमें गलत रास्ते पर जाने से रोकता है।
आज के मातेश्वरी के वचन मुझे अंदर तक छू गए। मातेश्वरी कहती हैं कि वास्तव में ज्ञान प्राप्त करना 1 सेकंड का ही काम है। यदि हम समझ सके तो सिर्फ एक सेकेंड लगता है यह समझने में कि मैं शांत स्वरूप आत्मा हूं और परमात्मा की संतान हूं। इस बात को समझने के लिए किसी हठयोग, जप तप इत्यादि की जरूरत नहीं है। सिर्फ अपनी वास्तविकता को पहचानने की जरूरत है। अपने अंदर झांकने की जरूरत है। मातेश्वरी कहती हैं की हमें अपने जीवन को प्रैक्टिकल बनाना है तो हमें सिर्फ इतना काम करना है कि हमें अपने बॉडी कॉन्शसनेस है से पूरी तरह निकलना होगा। वह बताती हैं कि हमें सोल कॉन्शियस होने में या दैवीय गुणों को धारण करने में मेहनत तो लगेगी। यह मेहनत ऐसी होगी कि हमें पल पल हर कदम पर सावधान रहना होगा। हमें ध्यान में रखना पड़ेगा कि माया हमें अपने रास्ते से हटाने के लिए हर तरह का प्रयास करेगी। तो हम जब हर कदम, हर समय सावधान रहेंगे तो माया कितना भी प्रयास कर ले हमें विचलित नहीं कर पाएगी।
मुझे लगता है प्रजापिता ब्रह्मा ईश्वरीय विश्वविद्यालय में जाने से मुझे जो सबसे बड़ा फायदा हुआ है। वह यही ज्ञान है जो मातेश्वरी दे रही हैं। यह जान लेना कि हम शांति स्वरूप आत्मा हैं और हमारा परमात्मा से क्या संबंध है। यही वह आधार है जिस पर दिव्यता पूर्ण जीवन की इमारत खड़ी हो सकती है।
!!ओम शांति!!
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प्रियदर्शी प्रतीक
29.06.2022
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