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Showing posts from November, 2018

गिट्टियां, गर्द और चारकोल

सुनी न जमीनी बात, कई मुद्दत बीती आजकल तो हवाओं में ही बात होती है। पैमाइश देशप्रेम की होने लगी जिधर देखो कद्र मूरत की ऊंचाई से तय होती है।। रौंदकर हरियाली बढ़ा जा रहा शहर देखो ...