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Showing posts from 2020

पलाश : वो पास है- वो पास थी

हसरतों की आँधियाँ थी, चाहतें बेहिसाब थी प्यार की लौ को जलाती, ख़ास वो मुलाकात थी। छोड़ संस्कारों की रवायत, बंदिशों की इंतेहा में तोड़ कर सब बेड़ियाँ, बैठी वो मेरे साथ थी। चक्रमय जीवन मे चलती, बंधनों की बिसात थी क्या जिंदगी रफ़्तार थी, या जिंदगी जज़्बात थी। कुछ पलों का साथ, फिर उम्र भर की दूरियाँ बेतकल्लुफ उमर ही थी, नासमझियां भी साथ थी। उम्मीद की नैया उतारी, साज़िशों के भंवर में दुश्वारियाँ दुनिया जहां की, प्रेमियों के साथ थी। कठपुतलियों के हाथ क्या ! विश्वास था और आस थी पर जीव के जीवनगति की लेखनी, विधि हाथ थी। प्रेम की आकुलता, और सांसारिकता की विवशता दीनता और विफलता ही प्रेमियों के हाथ थी। दुनिया की सब रवायतों का, क़ायदों का तौर था आँख में आँसू झरे, जब बिछुड़ने की बात थी। हाथ छूटा, संग टूटा और दिल टुकड़े हुआ मन हुआ था जार-जार, पर फेफड़ों में सांस थी। हाय दिल, तू फिर से उनके सामने झूठा बना बिछड़कर मर जायेंगे, क्या सिर्फ़ कोरी बात थी! आस और विश्वास, सब बस शब्द बनकर रह गये प्रेम तो अविचल रहा, पर दूरियाँ यथार्थ थी। दिवस बीते, वर्ष बीते, काल रथ बढ़ता रहा स्मृति; वन में अग्नि-सम खिलती हुई पलाश थी। सौजन्य...

क्षितिज के पार- द्वार की तलाश

क्षितिज के पार- द्वार की तलाश आस और विश्वास कि यही कहीं होगा नियंता का निवास जगत की अठखेलियाँ संसार की आवाज़ यहाँ आती होगी साफ़-साफ़ कठपुतलियों के नियंत्रण हेतु बिछाए गये तारों के सिरे होते होंगे समाप्त तो यही से करता होगा अभियंत्रण और नियंत्रण जगती के यंत्रो का तभी तो दूर देखती क्षितिज के पार करती द्वार को तलाश सोचती इन तारों में हो वो तार-जिससे बंधे हो मानव मन के व्यवहार हृदय की कंपन मन की तरंग भावनाओं की चढ़ाव-उतार हो शायद नियंता को ये आभास कि मन का नही होता यांत्रिक अभियंत्रण-नियंत्रण कही छूट रहे हो तार बिखर पड़े हो-निकल पड़े हो क्षितिज के उस पार देखती मौन हो गुनती बार बार करती बारम्बार क्षितिज के उस पार-द्वार की तलाश ----- प्रियदर्शी प्रतीक 30.10.2020

नायिका

जगत के क्षितिज के पार को निहारती आवाजो की भीड़ में मौन को खंगालती सुरमई सी आँख में स्वप्न है कई हजार भँवरे की गुंजन को संगीत में सॅवारती वो कामिनी कंचन सी-भरी बाल सुलभ चेष्टा से, व्योम के व्यक्तित्व को स्वयं में उतारती, प्रकृति के सौंदर्य का साम्य बनी नायिका, इठलाती-दुलराती, सजती-सँवारती।। ---- प्रियदर्शी प्रतीक 30.10.2020

Issue Censorship of OTT contents vis-a-vis Stay Order of Araria Court Bihar on broadcast of "Bad Boy Billionaires", a Netflix Docuseries

One docuseries of Netflix is in news as the release of said Netflix documentary ‘Bad Boy Billionaires’ which was scheduled to be released on 2nd September has been postponed. As per news reports of the Indian Express, A "local court" (sic)  in Bihar's Araria district last week passed an interim stay order on the broadcasting of Netflix documentary ‘Bad Boy Billionaires’, scheduled to be released on September 2, following a petition from Sahara chief Subrata Roy. The Economic Times has reported the matter, "Netflix’s series 'Bad Boy Billionaires'- was challenged in two separate petitions before two separate Courts last Friday. While the Delhi High Court had rejected absconding diamond merchant Mehul Choksi’s writ, a "local Court" ( sic) in Bihar had ordered interim stay on transmission of the series using the name of Subrata Roy, Chairman of Sahara India till the appearance of Netflix’s counsels." {I have serious objection on the Prefix "L...

छल का अन्नानास

{सोचा समझा छल था, हुआ ना ये अनायास था} {बारूद ही था परोसा, बस शक्ल से अन्नानास था} (1) पाशविकता का विशेषण हमने जना है मानवीयता को अलंकृत कर रखा है मृत्यु भय, ममता से कातर एक पशु ने उच्...

🌾आप कैसे है🌾

उम्हें देखा था जब मैंने आह सीने में आयी थी, वो मौसम क्या ही मौसम था नज़र उनसे मिलायी थी। झटककर बाल कांधे से वो सीधे चलकर आयी थी, कहा कि आप कैसे है हलक में जान आयी थी। उजियारे पाख ...

तुम

मुद्दतों से बेनूर था न जाने किसका कुसूर था नजर इनायत हुई तुम्हारी सोयी किस्मत चमक उठी है। उड़ती रंगत ख़बर में थी बेरुखी ही नजर में थी प्यार की बरसात आयी हमारी हस्ती दमक उठी ह...

जो आहों में असर होता

लॉक डाउन न हुआ होता मैं अपने घर गया होता। डर कानून का होता अपराध कम हुआ होता।। प्रकृति से प्रेम गर होता प्रदूषण ना किया होता।। मौत का डर नही होता तो घर में बंद ना होता।। इंसानियत सोच में होती कोरोना ना बना होता।। जो आहों में असर होता शी जिनपिंग मर गया होता।। ---- प्रियदर्शी प्रतीक 22.05.2020 दलसिंहसराय, समस्तीपुरम

भारत मे प्रवासी, हम भारत के लोग: कोरोना त्रासदी के संदर्भ में

कोरोना की त्रासदी से उपजे लॉक डाउन के दौरान सामने आती हुई तस्वीरे,भारतीय संविधान और उसकी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय को सुलभ करने की मंशा को मुँह चिढ़ाती दिखती है। इस...

भारत-भाग्य-विधाता

भारत-भाग्य-विधाता नींव बनकर वह पत्थर जो भूमि में दब जाता है, जिसके कंधों पर चढ़कर भवन भव्य इठलाता है।। जो बैठा अंतिम कतार में बारी गिनता जाता है, नाम पर जिसके चलता रुपया दस पै...

Curse of Lock Down: Whether fait accompli for Migrants

In the series of tragic events and shock felt by the nation aftermath the declaration of the COVID-19 epidemic as 'Pandemic' by the World Health Organisation and consequently National Lock Down by the Government, we have now witnessed the images of mutilated bodies of workers of age ranging between 20 to 30 on a railway track. As reported by the news agency, The Hindu, Sixteen migrant labourers, who were trying to return to their home State Madhya Pradesh on foot, were killed on Friday when a goods train ran over them between Jalna and Aurangabad districts. “From initial reports, it appears that they started walking on Thursday evening from Jalna and after walking 40 km and exhausted by their journey, decided to rest on the track, where they fell asleep. They were planning to walk to Bhusaval but tragedy struck,” said a policeman from the Karmad police station. Reasoning, i.e.; "DECIDED TO REST ON THE RAILWAY TRACK" might be used to showcase the negligence on the pa...

"अफ़साना-ए-हक़ीक़त"

वक़्त और बेवक़्त के साँचे तो दुनियावी है, अल्पना में हर रंग उसकी तासीर का ही होगा।। बेवक़्त के अंधड़ से बेनूरी सी तो छायेगी पर खुशबू से तेरी, गुलशन ये, शादाब रहेगा।। हर एक मुसाफि...

कोरोना डायरी 22 मार्च 2020

कोरोना की विश्वव्यापि दहशत को धता बताते हुए, हमलोग मोदीजी की कॉल पर अपने सरकारी आवास की छत पर थाली और ताली पीट कर खुद को जिम्मेदार नागरिक और जिम्मेदार सरकारी सेवक समझ कर गौरान्वित और खुश हो रहे थे। तभी खबर वायरल हुई कि पूरे बिहार को लॉक डाउन कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के कई जिले लॉक डाउन किये जा चुके है। यात्री ट्रेनें पहले ही बंद हो चुकी थी। लॉक डाउन शब्द कुछ दिनों से रोज सुन पढ़ रहे थे और सदोष अवरोध और सदोष परिरोध (Wrongful Restraint & Wrongful Confinement) की जानकारी लॉ स्कूल (BHU में Law Faculty को Law School कहते है) के दिनों से थी। लेकिन कसम से एक झटके में कॉन्सेप्ट क्लियर हो गया कि लॉक डाउन क्या चीज़ होती है और क्यों भारतीय दंड संहिता में सदोष अवरोध और सदोष परिरोध को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। परिवार और अपने गाँव-देश से लगाव का अंदाज़ा ऐसे ही वक्त होता है जब आप उनसे दूर होते है। बनारसी तबियत ऐसी बंदिशों में और कुलांचे मारती है। फ़िलवक्त, तमाम बेचैनी को परे हटाकर मन को शान्त रखकर ही अपने व्यक्तिगत और सेवा धर्म का निर्वहन किया जा सकता है। न्यायालय में अवकाश घोषित नही है प...

एक पाती, पिंजड़े से : कोरोना वायरस लॉक-डाउन

एक विषाणु ने मानव समाज की गति का पहिया थाम लिया है। बहुआयामी चुनौती आज समाज के सामने खड़ी है। हर तरफ अस्थिरता और भय का वातावरण व्याप्त है। मनुष्यता की परीक्षा की घड़ी है और मन...