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Showing posts from 2021

नव आयाम

Dedicated to Friends at Academy कैसे कटेगा वक़्त, कैसे मिलेंगे लोग हम सोच ही रहे थे कि आप आ गयी।। बरसों-बरस के साथ की उम्मीद भर गयी प्याले की गर्म चाय, मन को गुनगुना गयी।। अनजान से मिले थे, कब दोस्त बन गये सुनने-समझने-जानने तक बात आ गयी।। अभी तो ढ़ल रहे थे, नई जिंदगी में हम कि दोस्तों से जुदा होने की शाम आ गयी।। --- प्रियदर्शी प्रतीक 05.12.2021 पटना

भारत का संविधान

स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व का आलम्बन संविधान की उद्देशिका, संविधान का दर्पण।। गरिमामय जीवन, स्वतंत्रता, समता के आधार संविधान के प्राण है, सभी मूल अधिकार।। शासन की संकल्पना में, जन हित का है महत्व सु-शासन निश्चित करें, राज्य के नीति निर्देशक तत्व।। कैसा जीवन हम जिये, कैसे हो आदर्श जीवन दर्शन अभिरंजित, करते मूल कर्तव्य।। राष्ट्रपति- उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद के अधिकारी लोकतंत्र को पोषित करती, संसदीय प्रणाली।। राष्ट्र जीवन दर्शन में मण्डित न्याय अट्टालिका न्याय स्थापन हेतु सृजित, संघ की न्यायपालिका।। राज्यपाल व विधान मंडल का करता है अवधान उच्च न्यायालय उन्मेष हित, उपस्थित प्रावधान।। संघ राज्यक्षेत्र, पंचायत, नगरपालिका व सोसाइटी शक्तियों के विकेंद्रीकरण की जनहितकारी प्रस्तुति।। सुगम प्रशासन निर्णयन, शक्तियों का प्रबंध विसंगतियों के निराकरण हित केंद्र- राज्य संबंध।। निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल संविधान के उपवन में है राजभाषा के फूल।। संकट में हो प्रजातंत्र, हुई विकट परिस्थिति उत्पन्न राष्ट्र धर्म के अनुपालन हित, हैं आपात उपबंध।। भारत और भारतीयता के जीवन दर्शन का योग जीवन सार्थक ...

न्यायिक

बैठाये गए कुर्सी पर, नरेश की तरह जनता समझ रही है, सुरेश की तरह न्याय को संपुष्ट तभी कर सकेंगे हम जीवन रहेगा गर किसी दरवेश की तरह।।

#Relevance of Gandhism vis-à-vis Taliban's oppression, unrest and barbarism#

#Relevance of Gandhism vis-à-vis Taliban's oppression, unrest and barbarism# --------   In this hour of crisis in Afghanistan, no one could have imagined that Gandhiji and his path of non-violent protest could ever be relevant.   The Taliban's procession has started carving its space in the news for the last few days. But falling of the main cities of Afghanistan and eventually the capital Kabul under the control of Taliban in such easy way was unimaginable a few days ago. The Afghan army and administration surrendered to the Taliban without fight. The President fled the country while taking measures for his own security and leaving his people in despair. Images of people rushing to leave the capital, eager to make some way in the plane and the human body falling from the flying plane is enough to give glimpse of anarchy in the city and panic in the mind of a common man at the moment.   Keeping in view the past records, there is no need to explain the brut...

#तालिबान की बर्बरता, दमन और अशांति में गाँधी जी की प्रासंगिकता#

#तालिबान की बर्बरता, दमन और अशांति में गाँधी जी की प्रासंगिकता# -------- अफगानिस्तान में संकट की इस घड़ी में गांधीजी और उनका दिखलाया हुआ अहिंसात्मक असहयोग व विरोध का मार्ग इस प्रकार प्रासंगिक हो सकता है,  यह कोई सोच भी नहीं सकता था।  विगत कुछ दिनों से जिस प्रकार से तालिबान की वापसी की खबरें समाचार में अपनी जगह बनाने लगी और देखते ही देखते अफगानिस्तान के प्रमुख शहर और अंततोगत्वा राजधानी काबुल तालिबान की गिरफ्त में आई, वह कुछ दिन पहले कल्पना से परे की बात थी। अफगानिस्तान की फौज और प्रशासन ने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण सा कर दिया। वहां के राष्ट्रपति अपनी स्वयं की सुरक्षा के उपायों को करते हुए देश छोड़कर भाग चलें। राजधानी छोड़ने की अफरातफरी में भागते हुए लोग, वायुयान में किसी प्रकार जगह बनाने के लिए आतुरता, उड़ान भरते विमान से गिरते हुए मानव शरीर इस बात का अंदाजा लगाने के लिए काफी है कि एक आम आदमी के मानस पटल पर इस समय क्या चल रहा होगा। तालिबान की क्रूरता और भयावहता को बतलाने  की कोई जरूरत नहीं,  साथ ही यह भी समझाने की कोई जरूरत नहीं कि तालिबान के नियमों व रीति-रिवाजों क...

अमृत और विष: अमृत लाल नागर: एक दृष्टि

साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत अमृत और विष एक ऐसा उपन्यास है जो 1966 में प्रकाशित अवश्य हुआ, लेकिन इसमें उद्धृत पात्र व चरित्र उन्हीं सामाजिक संरचना, समस्याओं और भावनाओं को साझा करते हैं जो आज के समाज में भी प्रासंगिक है। एक अलग विधा में इस उपन्यास का सृजन हुआ है। उपन्यास के कहानी के केंद्र में एक लेखक और उसके द्वारा सृजित उपन्यास है। उपन्यास अंतिम चरण में स्वयं उपन्यासकार स्वयं लेखक के माध्यम से स्वीकार करते है कि इस डायरी और उपन्यास में उनके पड़बाबा व बाबा के जमाने से लेकर उनके अपने जमाने तक की न जाने कितनी परिस्थितियां, कितने चरित्र और चित्र एक बार फिर से जी उठे और वह उसी अनुभव विचार और कल्पना शक्ति से न जाने कितनी परिस्थितियां चरित्र और चित्र गढ़ते गए। एक उपन्यास में इतने पात्रों का सम्मिलन, कथानक को अस्त व्यस्त किये बिना और यथास्थिति हर पात्र के साथ न्याय करना, अद्भुत  व दुष्कर कार्य रहा होगा। यही कारण है की यदि कोई मुझसे पूछे की इस उपन्यास का कथानक क्या है तो एक सीधी कथा नहीं रखी जा सकती है। यह अपने तरह का एक अनूठा प्रयोग है जिसमें उपन्यास के भीतर उपन्यासकार एक उपन्यास लिखता एव...

Tribute to Flying Sikh

"Flying Sikh Milkha Singh"  In the 80s and 90s, Milkha Singh was one of the few famous personalities to be named in the sports world, apart from cricket, in everyday, common people's colloquial speech. Apart from the examples of Sunil Gavaskar, Kapil Dev, Sachin Tendulkar; Milkha Singh was the person whose name would be used to give an example that look, he runs like Milkha Singh. Today "Flying Sikh" have left us to complete the final and definite race of life. In order to pay tribute to him, when I think about him, I find that the life of Milkha Singh, his success is important not only because he gave India recognition on the playing field on the world stage at a time when we were not resourceful and at the level of facilities and infrastructure, our system looked backward in front of the world powers. Rather, his life is praiseworthy and exemplary for the reason that he made the adversity, storms and sorrows of life his strength. Even after getting success, ex...

श्रद्धांजलि: उड़न सिख की याद में

"उड़न सिख मिल्खा सिंह" 80 और 90 के दशक में, रोजमर्रा, आम लोगों की बोलचाल में खेल की दुनिया की शख्सियतों में क्रिकेट के अलावा जिन कुछ चुनिंदा महारथियों का नाम आता था उनमे से एक थे मिल्खा सिंह। सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर की मिसालों के अलावा मिल्खा सिंह वो शख्शियत थी जिनका नाम लेकर मिसाल दी जाती कि ये देखो ये मिल्खा सिंह की तरह दौड़ता है। आज "उड़न सिख" हमें छोड़कर जीवन की अंतिम व निश्चित दौड़ पूरी करने निकल गए है। उनको श्रद्धांजलि देने के क्रम में जब मैं उनके बारे में सोचता हूँ तो पाता हूँ कि मिल्खा सिंह का जीवन, उनकी सफलता सिर्फ इस कारण महत्वपूर्ण नही है कि उन्होने उस दौर में विश्व पटल पर खेल के मैदान पर भारत को पहचान दिलवायी जब हम संसाधन, सुविधा और आधारभूत संरचना के स्तर पर विश्व की शक्तियों के सामने पिछड़े नज़र आते थे। बल्कि इस कारण से भी उनका जीवन प्रशंसनीय, अनुकरणीय है कि जीवन की प्रतिकूलता, झंझावात व दुःखों को उन्होंने अपनी शक्ति बनाया। सफलता, श्रेष्ठता और सराहना मिलने के बाद भी वो जीवन भर अपनी सहजता, सरलता और सौहार्दपूर्ण व्यक्तित्व को बनाये रख सकने में काम...

कुदरत और कोरोना

बेतरतीब सा मंजर है, ठहर तो लीजिए साँसे उखड़ रही है, आसरा तो दीजिए कुदरत की नेमतों का मोल गर समझ चुके तो खींचकर एक साँस फेफड़ो में लीजिए। बेबसी-लाचारी फ़िजां में भरी पड़ी ताक़त की दौड़ दुनिया को भारी बहुत पड़ी बोतलबंद पानी की आदत अभी पड़ी थी अब फेफड़ों में ऑक्सिजन सिलेंडर से लीजिए। सब कह रहे है कि ये निराशा का दौर है तड़पती आस- टूटती साँसों का शोर है पर शायद वो कह रहा कि तुम ठहर रहो कभी तुममें ज़ोर था, अभी उसका ज़ोर है। ताकत की अंधी दौड़ ने कोरोना बना दिया रुपया सहेजने में ही जीवन गँवा दिया प्रकृति से उलट चलकर, हम खुश बहुत हुए इस आपदा की चोट ने आईना दिखा दिया।। ---- प्रियदर्शी प्रतीक 21.04.2021

एक तेरे होने भर से

एक तेरे होने भर से ❤️❤️ ऋतु है, रंग है, हरियाली है, पानी है एक तेरे होने भर से मौसम की रवानी है। मादकता है, उमंग है, एहसास है, कहानी है एक तेरे होने भर से जीवन है, जवानी है। झरना है, तरंग है, मौजों की छेडख़ानी है एक तेरे होने भर से दुनिया कितनी रूमानी है। मौका है, प्रसंग है, बात एक बतानी है एक तेरे होने भर से मेरी भी इक कहानी है। ----- प्रियदर्शी प्रतीक