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Showing posts from November, 2025

नुक्कड़ नाटक: The Classroom – “Competition Se Pehle Compassion!”

दृश्य 1 :  The Classroom – “Competition Se Pehle Compassion!” (क्लास रूम का दृश्य। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड आ चुके है। बच्चे साथ खड़े है और उनके टीचर्स भी साथ खड़े है। ) एक टीचर: तुम बच्चे हो इस स्कूल की जान, अच्छे नंबर लाकर दी है तुमने इस स्कूल को पहचान सब बच्चों congratulate करते है। टीचर: अरे अर्जुन, तू क्यों लगता उदास है, मार्कशीट नही तेरे पास है। (फिर रिजल्ट चेक करके कहते है): इस साल के इस रिजल्ट में टीना है टॉप और अर्जुन हुआ है फ्लॉप सब बच्चे खिलखिलाते है। लोग तालियां बजा रहे मोना: (हंसते हुए) इसकी मार्कशीट में नहीं है दम, हर सब्जेक्ट में है इसके नंबर कम टीचर: शरारत में लगता ध्यान है, स्कूल तुझसे परेशान है। नाक में कर देता है दम, और नंबर भी लाया है इतने कम (सचिन सर झुकाके खड़ा है) (सभी हंस रहे है) टीना: sorry सर क्या मैं कुछ बोल सकती हूं। टीचर: बिल्कुल बच्चा, तेरी बातों के तो सब है कायल, तू ही तो है इस क्लास की गूगल।  टीना: जब हम सभी बच्चे है स्कूल की जान, हम सभी से है इसकी पहचान, तो क्या ठीक होगा हममें प्रतिस्पर्धा का भाव, और सामंजस्य-सद्भाव का अभाव टीचर: वाह टीना, तुम्ह...

नज़्म मोहब्बत और रुसवाई

मोहब्बत की सड़क पर तुम भी मै भी  हर खुशी औ रंज-ओ-गम के हमसफर भी फिर क्यों भला हर मोड़ पर कतरा रहे हो उलझनों से इस कदर घबरा रहे हो हैं मोहब्बत तब तो उलझन भी रहेगी दिल में धड़कन, साथ तड़पन भी रहेगी सच्चे आशिक़ को क़ज़ा का खौफ कैसा प्रेमी का हो साथ जब तौफीक जैसा गर दुनियावी रस्मों रिवाजों के पार जाओगे (तो ही) माशूक की बाहों में नजात पाओगे जब खौफ के साये में बसर करना है फिर क्यू भला मोहब्बत का सफर करना है जब तेरा अरमान ही, मेरे प्यार को रुसवा करना किस हौसले किस दम फिर प्यार का दम भरना घुट घुट कर जब तिल तिल के ही हमें जीना है मेरे महबूब मुझे जीना नहीं मोहब्बत के लिए मरना है।। मेरे महबूब मुझे जीना नहीं मोहब्बत के लिए मरना है।। ---- ---- प्रियदर्शी प्रतीक 21.11.2025 डुमरांव, बक्सर  (मित्र कवि नीरज के दर्द से प्रेरित)

नुक्कड़ नाटक--ट्रैफिक जाम: छोटी दूरी, बड़ी सोच

ट्रैफिक जाम: बच्चे गाड़ियों की शक्ल बनाकर खड़े हैं। सब एक दूसरे से  लड़ते भिड़ते आगे पीछे हो रहे हैं। आगे का रास्ता नहीं दिख रहा है। गाड़ियां जोर से हॉर्न बजा रही है। चारों तरफ शोर ही शोर है। गाड़ियों से निकलता धुआं माहौल को और जहरीला बना रहा है। बच्चे एक साथ: सुनो सुनो और जागो सब, पास आओ मत भागो सब, बातों में है दम - वंदे मातरम, जीने का ढंग - सिखलाते है हम  वंदे मातरम - वंदे मातरम नाटक का दृश्य:----- एक बच्चा गब्बर सिंह के रूप में: कितनी गाड़ियां है स्टूडेंट बच्चा: सरदार, सैकड़ों गब्बर: और बच्चे कितने है?? स्टूडेंट: सरदार, पचास गब्बर: पचास बच्चों ने स्कूल आने के लिए इतना शोर मचा रखा है कितनी दूर है स्कूल? स्टूडेंट: सरदार, 3 किलो मीटर गब्बर: तीन किलोमीटर जानें के लिए तीन सौ गाड़ियों का जाम, इतना शोर और इतनी परेशानी बहुत नाइंसाफी है!!!!!!! क्या मिलता है, गाड़ी से स्कूल आकर स्टूडेंट: रोते हुए...रोज पापा की डांट, स्कूल लेट होने का डर, और ढेर सारी टेंशन गब्बर: गुस्से में....इतना शोर और इतना पॉल्यूशन क्या तुम्हारे दोस्त गिनाएंगे स्टूडेंट: जोर से रोते हुए....वो भी मिलता है लेकिन उसक...

नुक्कड़ नाटक: प्लास्टिक से दूरी -ना रहे मजबूरी

दृश्य 1 : The Plastic Habit – “Ek Baar Ka Nasha!” (बाज़ार का दृश्य। बच्चे प्लास्टिक बोतलें खरीदते जा रहे हैं। खाली बोतलें फेंकी जा रही हैं।) Narrator: सृष्टि का नियम है जो जन्म लेता है उसे मरना भी होता है। सब इसी जल, वायु, आकाश, अग्नि व भूमि से बनते हैं और मरकर इसी में विलीन हो जाते हैं। एक बच्चा (उत्साहित लेकिन अनजान): सब का मतलब क्या हुआ आदमी जानवर पेड़ पौधे और सामान भी!!!! Narrator: हा सब कुछ। यह प्रकृति का नियम है। एक बच्चा हंसते हुए, हाथ में प्लास्टिक पानी की बोतल लिए— इसका मतलब इंसान ने प्रकृति पर जीत हासिल कर ली। इंसान ने ऐसा कुछ बना दिया जो जन्म-जन्मांतर तक नहीं समाप्त होता। वैसे का वैसा बना रहता है। यह प्लास्टिक...हंसता है hahaha  सभी बच्चे आश्चर्य में है। Narrator: हंसता है hahahah  बच्चे तूने दूसरा नियम तो सुना ही नहीं। जो नहीं मरता, वैसा का वैसा बना रहता है वही इस प्रकृति का, इस सभ्यता का, इस समाज के विनाश का कारण बनता है। फिर हंसता है hahaha ये देखो--- (बच्चे एक एक करके हाथों में पोस्टर लेकर गुजरते है जिसमें प्लास्टिक के कारण हुई त्रासदी की फोटो है। और एक एक करके ...