नायिका
नदिया के कूल पर धारा संग खेलत है, निरखत है जल तरंग, मोहत है- रिझत है; धार बीच धारा में पायल संग पद परसे, पायलिया झनकार, कल कल है- झल झल हैं। बादल की राशि बीच सौदामिनि सी गरजे विपुल जल राशि में पद पटकत झटकत है नीर भर अंजुरी आकाश में उछालत वो प्रकृति की सुषमा सम निखरत है बिखरत है। स्वर्णिम सी नायिका, चंदन सम शीतलता; कलाधर की कला सम चलत है- बैठत है; वारी वारी जात है, भुवन मन मोहिनी पर "प्रतीक" रूप राशि विलोचन में समेटत है। ------ प्रियदर्शी प्रतीक 12.06.2025