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Showing posts from 2023

विकसित भारत 2047 में

मेरे शब्दों में यदि एक पंक्ति में "विकसित भारत 2047" कैसा हो यह दर्शाना हो तो मैं यह कहूंगा :- "अतुल्य भारत जिसमें व्यक्ति से व्यक्ति के बीच विद्वेष के सारे आधार नष्ट हो चुके होंगे। व्यक्ति का व्यक्तित्व और कर्म ही उसके उन्नति के आधार होंगे। अच्छी शिक्षा एवं चिकित्सा सेवा प्राप्त करने के लिए उच्च आय वर्ग में शामिल होने की बाध्यता नहीं होगी।" ऐसा करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे विशेष रूप से वह इस प्रकार से है:-- 1. गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के अध्यापन स्तर व विषयों पर इस दृष्टि के साथ नियंत्रण व विनियमन कि एक समय के उपरांत उनका उन्मूलन किया जाना है। 2. माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों की संख्या आबादी की दृष्टि से विनियमित की जाए। ऐसी व्यवस्था बन जाए की एक क्षेत्र के सभी समवय विद्यार्थी एक ही विद्यालय में माध्यमिक स्तर तक अध्ययन करें। माध्यमिक स्तर तक एक साथ एक विद्यालय में अध्ययन करने से उस क्षेत्र विशेष की एक पीढ़ी में परस्पर सामंजस्य व लगाव की भावना पैदा होती है। यह विशेष रूप से विद्वेष को समाप्त करने की कड़ी होगी। 3. सरकार को कर अदा करने वाले व्यक्तियों की इस प्रक...

फ्लश टैंक का पानी

फ्लश टैंक में पानी की कीमत --------- हम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत कुछ करते रहते हैं। बहुत सामानों का उपयोग करते हैं। लेकिन अक्सर हम यह नहीं समझ पाते कि उनकी कीमत क्या है! जब तक कि उनका अभाव सामने ना आ जाए। ऐसी ही एक चीज है जो एक नजर में बहुत ही तुच्छ समझ में आएगी लोगों को। लेकिन उसका महत्व तब समझ में आता है जब वह ना हो। वह है इंग्लिश मॉडल के टॉयलेट में फ्लश टैंक का पानी। आम तौर पर लोगों की आदत रहती है कि स्वच्छता का ध्यान रखते हुए, पूरा फ्लश टैंक खाली कर देते हैं। जरूरत के हिसाब को ध्यान में नहीं रखते। ऐसी आदत मुझे भी रही। मुझे इसकी कीमत समझ में आई अपने ट्रेनिंग अकैडमी की 2 दिन की ट्रेनिंग के दौरान। जैसा आम तौर पर होता है, ट्रेनिंग में पहुंचते ही रूम में जाने पर यह समझ में आया की कुछ समस्याएं हैं जैसे एयर कंडीशन काम नहीं कर रहा, रिमोट नहीं है, तौलिया साफ नहीं है और फ्लश टैंक काम नहीं कर रहा। इस संबंध में जो साथी अधिकारियों से चर्चा की गई तो यह बात सामने आई कि AC तो वैसे ही बहुत वर्षों से काम नहीं कर रहा है। अब तक तो आपको आदत पड़ जानी चाहिए थी। ये तो आपकी गलती हैं कि आप इसके लिए त...

लईया लेलो गट्टा लेलो

"लईया लेलो गट्टा लेलो  आठे आना पउवा लेलो" मेले में उठती वो आवाजें अब नहीं आती है। अब कोई सामान अपनेपन के साथ नहीं बेचता-खरीदता। दुकान में दुनियाभर की बात बताने वाले सेल्समैन नहीं मिलते। बिना किसी मकसद से हाल-चाल लेने वाले कम होते जा रहे। अनजाने से राम-राम करने का जमाना ही लद गया है। आठ आने पउवा भर छोड़िए, छटांक भर भी नहीं मिलेगा। मेले से लेकर मॉल और मेट्रो का सफ़र तय हो गया। हर काम में समय बचाने में लगी रही मानव सभ्यता ने ऐसे ऐसे उपकरण ईजाद किए कि हर काम में लगने वाला समय कम से कम हो गया। लेकिन पेड़ की छांव में खाट बिछाकर पत्तों से छनकर आने वाली धूप चेहरे पर लेते हुए सुस्ताने वाले पल लोगो की जिंदगी से खतम हो गए है। भदोही के बरवा बाजार के दशहरे के मेले में अभी भी पुकार आती है "जलेबिया बोलता लड़कवन का मनवा डोलता", लेकिन अब लड़कवन का मन नहीं डोलता है। ------- प्रियदर्शी प्रतीक 04.09.2023

मैं तुझको याद करता हूं।

गुजरते रास्तों मे गुजरे वक्त की तलाश करता मैं, बातों के बिखरे मोतियों को यादों में चुनता हूं। मैं तुझको याद करता हूं।। तुझसे अजनबी होने का भरता स्वांग मैं, तेरा होना अपने साथ में महसूस करता हूं। मैं तुझको याद करता हूं।। जमाने से तुमसे रूबरू न हो सका हूं मैं, तेरी हर अदा और नाज़ को सीने में रखता हूं। मैं तुझको याद करता हूं।। सामने आने पर नजरअंदाज करता मैं, दूर रहकर तुझको हरपल  याद करता हूं। मैं तुझसे प्यार करता हूं।। ---- प्रियदर्शी प्रतीक 28.06.2023 बक्सर

प्रधानमंत्री उद्बोधन: सिविल सर्विस डे 2023

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सिविल सर्विसेज डे पर अपने जो विचार सबके सामने रखें, वह उत्कृष्ट हैं। सिविल सेवकों के काम और उनकी परिस्थितियों को बखूबी समझने वाला व्यक्ति ही ऐसे विचार रख सकता है। मेरा ध्यान जिस बात ने आकृष्ट किया वह थी सरकारी सेवकों का आह्वान इस प्रकार से किया जाना की "देश ने आपको मौका दिया है"। यह अपने आप में एक अनूठी बात है। अभी तक हम लोग जिन भावनाओं से मानसिकता से रूबरू होते रहे हैं, उसमें राज्य या संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाला व्यक्ति यह समझता रहा है कि उसने पद प्राप्त किया है। इसमें कोई संदेह नहीं है की संघ या राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं अत्यंत दुष्कर होती हैं जिनमें सफलता पाना, एक कठिन तपस्या के पूरी होने के समान होता है। जो भी व्यक्ति वह सफलता पाता है उसे अपने श्रम पर गर्व करने का अधिकार तो मिलना ही चाहिए। परंतु उसके अंदर यह भावना अवश्य होनी चाहिए कि उसे एक मौका दिया गया है जो इस देश के किसी अन्य व्यक्ति को भी दिया जा सकता था। साथ ही व्यक्ति जिस देश समाज में रहते हुए उत्तरोत्तर सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है वह देश - समाज से कुछ न क...

श्रीरामचरितमानस: शंका समाधान

#श्रीरामचरितमानस के संबंध में अनेक प्रकार के मत व चर्चाएं पढ़ने सुनने को मिल रही हैं। अनेक चौपाइयों व दोहों को सामने रखकर विभिन्न प्रकार के दोषों का आरोपण मानस पर किया जा रहा है। मुझे लगता है #बालकांड का #दोहा_संख्या_6 लोगों द्वारा इस संदर्भ में ध्यान में रखा जाना चाहिए:--- दोहा जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार। संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार॥6॥ भावार्थ- विधाता ने इस जड़-चेतन विश्व को गुण-दोषमय रचा है, किन्तु संत रूपी हंस दोष रूपी जल को छोड़कर गुण रूपी दूध को ही ग्रहण करते हैं॥6॥ व्यक्ति से अपेक्षा होती है कि वो दोषों को छोड़कर गुण ग्रहण करेगा। सोचने वाली बात है कि जब विधाता ने इस विश्व की रचना की तो स्वयं विधाता भी इसे सिर्फ़ और सिर्फ़ गुणों से भरपूर नहीं बना सका। उसमें दोष भी आ गये। तो किसी ग्रन्थ में किसी को कोई दोष नज़र आ जाये तो बहुत आश्चर्य वाली बात नहीं होनी चाहिए। जब ईश्वर के रचित संसार में दोष दिख जाते है तो ईश्वर रचित मनुष्य की रचना में दोष दिखाये जाने पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। आज के विश्व मे किसी भी ग्रन्थ की निरपेक्ष टीका देखने पर ग्रन्थ के गुणों के साथ ...

हाक़िम

रखें है सर जरा ऊँचा, वो लंबी नाक रखे है। निकलते जब भी वो बाहर, सिजदे की आस रखे है।। पेशकार औ सिरस्तेदार, खास इनके है ताबेदार। प्रशासन में दबाकर, मुग़लिया इतिहास रखे है।। है हाकिम ये कचहरी के, शक्ति ओहदे में रखे है। कानूनों के विवेचन का, लंबा इतिहास रखे है।। न डरते है किसी से, ना किसी को कुछ समझते है। सम्मन, वारन्ट, कुर्की डिक्री सम ब्रम्हास्त्र रखे है।। है फीके रंग, फीका ढंग, दिखे फीकी तबियत के। छिपाकर फ़िके रंगों में, रंगीं मिज़ाज़ रखे है।। दीपक तले होता अंधेरा, इस कहावत को। अपनी हरकतों औ ढंग से, कर चरितार्थ रखे है।। ----- प्रियदर्शी प्रतीक (हर विधा की, हर कार्य की जैसे एक पहचान होती है। वैसे ही उस कार्य को करने वाले की भी एक पहचान होती है। कचहरी  व हाकिम को नजदीक से देखने वाले लोगों के विचारों को शब्द देने का एक प्रयास किया है।)

तीसरा पहर रात का

नींद टूटी रात के तीसरे पहर में मन की चादर पर उसीकी सिलवटें है याद का तकिया सिसकता सा पड़ा है उलझनों का पंखा घररघर चल रहा है बातों का गद्दा है जिसपर मैं पड़ा हूँ कसमसाकर बात ऐसी कह रहा है भूल जा उसको वो तुझको छल गया है। ---- प्रियदर्शी प्रतीक