फ्लश टैंक का पानी
फ्लश टैंक में पानी की कीमत
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हम लोग रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत कुछ करते रहते हैं। बहुत सामानों का उपयोग करते हैं। लेकिन अक्सर हम यह नहीं समझ पाते कि उनकी कीमत क्या है! जब तक कि उनका अभाव सामने ना आ जाए।
ऐसी ही एक चीज है जो एक नजर में बहुत ही तुच्छ समझ में आएगी लोगों को। लेकिन उसका महत्व तब समझ में आता है जब वह ना हो। वह है इंग्लिश मॉडल के टॉयलेट में फ्लश टैंक का पानी।
आम तौर पर लोगों की आदत रहती है कि स्वच्छता का ध्यान रखते हुए, पूरा फ्लश टैंक खाली कर देते हैं। जरूरत के हिसाब को ध्यान में नहीं रखते। ऐसी आदत मुझे भी रही।
मुझे इसकी कीमत समझ में आई अपने ट्रेनिंग अकैडमी की 2 दिन की ट्रेनिंग के दौरान। जैसा आम तौर पर होता है, ट्रेनिंग में पहुंचते ही रूम में जाने पर यह समझ में आया की कुछ समस्याएं हैं जैसे एयर कंडीशन काम नहीं कर रहा, रिमोट नहीं है, तौलिया साफ नहीं है और फ्लश टैंक काम नहीं कर रहा।
इस संबंध में जो साथी अधिकारियों से चर्चा की गई तो यह बात सामने आई कि AC तो वैसे ही बहुत वर्षों से काम नहीं कर रहा है। अब तक तो आपको आदत पड़ जानी चाहिए थी। ये तो आपकी गलती हैं कि आप इसके लिए तैयार नहीं थे। जरूरी नही कि हर बार अच्छा कमरा ही आपको मिले।
हमें भी समझ में आया कि भाई ट्रेनिंग एक कठिन तपस्या के लिए आपको तैयार करती है तो ऐसे में AC की शिकायत लाज़िमी नहीं। फिर ग्लोबल वार्मिंग की समस्या के हल में एक छोटा सा योगदान तो देना बनता है। फिर आपको हर जगह तो AC की सुविधा मिलती नही है फिर एडजस्ट करिए।
लेकिन फ्लश टैंक की शिकायत पर सभी का यही विचार बना कि इसमें एडजस्टमेंट होना तो थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में विचार बना कि इसकी शिकायत तो की जानी चाहिए।
इसकी शिकायत पर जो बात सामने आई जो जवाब सामने आए वह अद्भुत है। वह जवाब यह बताते हैं कि किस प्रकार से हमारी व्यवस्था आज भी "संतोषं परम् सुखम्", सामंजस्य एवं साहचर्य के भाव पर टिकी हुई है।
जो बात सामने आई वह यह थी कि आप घर में फ्लश टैंक खराब हो जाए तो क्या करेंगे! हमारा जवाब था कि हम प्लंबर बुला लेंगे। प्लंबर ना मिला तो क्या करेंगे!! अब कुछ कहना मुश्किल था। तो ऐसे में निदान भी वहीं से मिला। वहां से निदान मिला क्या बाल्टी से ऊपर से पानी डालकर फ्लश क्यों नहीं कर लेते!!!!
यदि अपने भारतीय मॉडल के टॉयलेट होते तो यह समस्या भी ना होती। लेकिन अंग्रेजी मॉडल के शौचालय में इस तरह ऊपर से पानी डालना बड़ा कुत्सित कर्म मालूम पड़ता है।
यह बात रखी गई की क्यों नहीं कमरा बदल दिया जाए। तो यह जवाब सामने आया ऐसा नहीं हो सकता। साथियों का भी कहना था की विकट परिस्थिति में रणभूमि से भाग नहीं जाना चाहिए। वह कमरा आपकी रणभूमि है। वहां की परिस्थितियों का सामना करिए। जो कमरे खाली बंद रखे गए हैं वह आपको नहीं दिए जा सकते। उनके बंद रहने में ही सबकी भलाई है।
अद्भुत अद्भुत अद्भुत। इस संबंध में, इस तरह से कभी सोचा नहीं था।
किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति उत्पन्न हो गईं। ऐसे में क्या करे। निर्णय लेना था। क्योंकि इस नश्वर संसार में कुछ ऐसे दबाव होते हैं जिन्हें अन्यथा खारिज नहीं किया जा सकता। जैसे प्रकृति की पुकार का दबाव।
ऐसे में शास्त्र सामने आए मार्गदर्शन के लिए।
"संतोषं परमास्थाय सुखार्थी संयतो भवेत्।
संतोष मूलं हि सुखं दुखमूलं विपर्ययः।।"
अर्थात:- सुख की इच्छा करने वाला व्यक्ति परम् सन्तोष को धारण कर के संयमित जीवन व्यतीत करे क्योंकि सन्तोष ही सुख का मूल है और उसके विपरीत असंतोष दुख का कारण है।
ऐसी स्थिति में कुछ साथियों ने सलाह दी कि भाई इंग्लिश मॉडल में निवृत होने के बाद ऊपर से पानी डालना बहुत ही अवांछित अनुभव हो सकता है। ऐसे में उचित होगा कि फ्लश टैंक को खोलकर उसमें पहले ही पानी भर लिया जाए। अब बाल्टी में पानी भरकर उसे उठाकर (क्योंकि वॉशरूम में मग भी नहीं था) बाल्टी से फ्लश में पानी भरना, यह भी एक अद्भुत नवीन अनुभव रहा।
इन सब प्रकरण में जो सबसे अच्छी बात हुई वह यह थी कि समझ में आया कि व्यक्ति को शौचालय का इस्तेमाल करते हुए, दिमाग में यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि फ्लश में भरा पानी अनमोल है। जितनी आवश्यकता हो उतना की पानी उसमे से निकाले। जब फ्लश टैंक अपने आप आसानी से भरता है, पानी खत्म होते ही अपने आप उसमें पानी भर जाता है तो यह बात नहीं समझी जा सकती। कदापि नही समझी जा सकती है। यह बात तभी समझी जा सकती है जब आपको बाल्टी से उठकर पानी फ्लैश टैंक में भरना हो।
जैसा प्रशिक्षण एकादमी के कमरे में रहने पर अनुभव मिला। यह समझ में आया कि एक बार में बटन दबाकर पानी न बहा दे। उसे जरूरत के हिसाब से खर्च करने का तरीका समझ में आया और फ्लश टैंक के पानी की कीमत समझ में आई।
जिंदगी में कभी-कभी कुछ परेशानियां सामने आती है तो वह नए अनुभव दे जाती है और जीवन की छोटी-छोटी चीजों की कीमत समझा जाती है। तो समझिए और सहेजिए अपने अपने फ्लश टैंक को और उसके पानी को।
कोटि-कोटि धन्यवाद।
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प्रियदर्शी प्रतीक
06.10.2023
गायघाट, बिहार
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