IIT बाबा: शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूं
बीते दिनों से एक गीत काफी लोकप्रिय हुआ है जिसके बोल है "शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूं।" इसे जैसे गाया गया, मुझे उसका भाव आता है वह बहुत ही अच्छा था और बहुत लोगों को पसंद आया । इस गीत को मैंने भी कई बार गुनगुनाया और कई बार अपने फोटो के साथ इसका बैकग्राउंड म्यूजिक लगाया भी। लेकिन मैं समझ नहीं सका था। इसके मायने क्या है शून्य हो रहा हूं मतलब क्या हो रहा है क्यों शून्य हो रहा हूं??? हमें बचपन से जब स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं तो पढ़ाई के दौरान टीचर कहते हैं जो बच्चा ठीक से पढ़ाई नहीं करता कि तुम्हारे शून्य आएंगे, तुम जीरो हो। और जीरो को, शून्य को बड़े ही बेअदबी के साथ देखा जाता है, अपमानजनक अवस्था को दिखाता था जीरो या शून्य । फिर इसको क्यों लोग इतना पसंद कर रहे हैं क्यों यह कहते हैं कि मैं शून्य हो रहा हूँ, शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूँ। ओशो की बुद्ध की देशना पर एक सीरीज किताबों की है जिसमें से आठवां भाग है अतृप्ति क्यों? इसमें एक जगह शून्य की बात करते हुए, निर्वाण और मोक्ष के अंतर को समझाते हुए ओशो कहते हैं कि "शून्य एक संख्यातीत चीज है।, शून्य मा...