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Showing posts from February, 2025

IIT बाबा: शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूं

बीते दिनों से एक गीत काफी लोकप्रिय हुआ है जिसके बोल है "शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूं।" इसे जैसे गाया गया, मुझे उसका भाव आता है वह बहुत ही अच्छा था और बहुत लोगों को पसंद आया ।  इस गीत को मैंने भी कई बार गुनगुनाया और कई बार अपने फोटो के साथ इसका बैकग्राउंड म्यूजिक लगाया भी। लेकिन मैं समझ नहीं सका था। इसके मायने क्या है शून्य हो रहा हूं मतलब क्या हो रहा है क्यों शून्य हो रहा हूं??? हमें बचपन से जब स्कूल कॉलेज में पढ़ते हैं तो पढ़ाई के दौरान टीचर कहते हैं जो बच्चा ठीक से पढ़ाई नहीं करता कि तुम्हारे शून्य आएंगे, तुम जीरो हो। और जीरो को, शून्य को बड़े ही बेअदबी के साथ देखा जाता है, अपमानजनक अवस्था को दिखाता था जीरो या शून्य । फिर इसको क्यों लोग इतना पसंद कर रहे हैं क्यों यह कहते हैं कि मैं शून्य हो रहा हूँ, शिव समा रहे मुझ में और मैं शून्य हो रहा हूँ। ओशो की बुद्ध की देशना पर एक सीरीज किताबों की है जिसमें से आठवां भाग है अतृप्ति क्यों? इसमें एक जगह शून्य की बात करते हुए, निर्वाण और मोक्ष के अंतर को समझाते हुए ओशो कहते हैं कि "शून्य एक संख्यातीत चीज है।, शून्य मा...

माघ पूर्णिमा महाकुंभ स्नान डायरी

#माघ #पूर्णिमा, #महाकुम्भ, #प्रयागराज ----------------------------------------- माघ का सूर्य अस्त होने को था, अरैल के घाट से मद्धम गति से यमुना जी के जल में गोते लगाते हुए नाव पवित्र संगम की ओर बढ़ रही थी। अपने चारों और मैं देख पता था कि एक दूसरे से बिल्कुल अनजान व्यक्तियों का समूह अपने-अपने समूह में रहते हुए, एक बड़े समूह का निर्माण कर रहा था जिसमें सबके अंदर,बहुत हद तक, एक समान भाव, धार्मिक चैतन्यता और उत्साह था। पानी पर तैरते हुए कृत्रिम घाट के पास सैकड़ो नाव लगी हुई थी जिनमें कुछ नाव से निकल कर घाट पर पहुंच के स्नान की तैयारी में लगे थे तो कुछ लोग वापस आ जा रहे थे नदी के बीच नावों का आपस में टकराना और एक दूसरे के बीच रास्ता बना देना, इन सभी प्रक्रियाओं के बीच में हर व्यक्ति का मन धार्मिक आस्था से लबरेज हो पवित्र जल में डुबकी लगाने के लिए तैयार हो रहा था। घाट से नीचे पैर रखते ही मखमली बालू की तलहटी का स्पर्श होता है। यह प्राकृतिक व्यवस्था है या कृत्रिम तौर पर प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंध कि इस विराट संगम स्थली पर घुटने भर जल का प्रवाह देखने को मिलता है, जिसमें निर्भय हो सशरीर प्रवेश...