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छल का अन्नानास

{सोचा समझा छल था, हुआ ना ये अनायास था} {बारूद ही था परोसा, बस शक्ल से अन्नानास था} (1) पाशविकता का विशेषण हमने जना है मानवीयता को अलंकृत कर रखा है मृत्यु भय, ममता से कातर एक पशु ने उच्...