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Showing posts from August, 2022

मास्क के पीछे की दुनिया

गाड़ी से चलते चलते मैं गलती से वन वे आया वहां खड़ा ट्रैफिक इंस्पेक्टर मुझपर बिल्कुल न झल्लाया, बोला कि भाई साहब, आप गलत आ गए हैं। तो मैं घबराया कड़ी धूप में राशन लाने थैला ले मै घर से निकला। उसी धूप में पीछे से कॉरपोरेटर दौड़ के आया, बोला कि क्यों परेशान है, भाई साहब, राशन घर आ जाएगा। तो मैं सकुचाया ग्राहकों की लंबी कतार-मेरा नम्बर लंच में आया देखके मुझको बैंक का अफसर हल्की सी मुस्कान ले आया, बोला कि न परेशान हो समय आपका और न लूंगा, तो मैं अचकचाया इसी झोंक में कुछ मैं ऐठां, सरकारी बस में जा बैठा कंडक्टर उठ के नही आया, मैं उसपर थोड़ा गुर्राया इसपर वो इतना चिल्लाया, थोड़ा सा भी रहम न खाया उठकर टिकट कटाके जाओ वरना बस से बाहर जाओ क्या रहस्य यह कैसी माया अब मुझको कुछ समझ न आया बाबाजी की शरण में आया उन्होंने मुझको राज बताया स्वार्थ भरी इस दुनिया मे, नादान कहाँ से आया है! आँख खोल-अब समझा कर, जो कुछ होता वो माया है सद्भावना सप्ताह में, चुनाव जब हो राह में काले कौवे को हंस बना देते है लोग एक चेहरे पर, कई चेहरे लगा लेते है लोग कई धज में, कई रंग में नज़र आते है लोग चेहरे पर अब मास्क लगाते है लोग असली ...

स्वर्गिक अनुभूति: शांतिवन, माउन्ट आबू

आज मैं शांतिवन में हूँ। यह शांतिवन माउंट आबू में स्थित है। आबू रोड रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर की दूरी पर यह शांतिवन प्रजापिता ईश्वरीय विश्वविद्यालय के नाम से संचालित होने वाली संस्था है। इसे ब्रह्मा बाबा ने स्थापित किया था। मनुष्य के मन में सदैव से स्वर्ग और नरक की अलग-अलग व्याख्या रही है। सदैव मानव मन स्वर्ग और नरक को परिभाषित करता रहा है। स्वर्ग को अनेक प्रकार से परिभाषित किया गया है। परंतु वह एक बात जो मुझे अपने 1 दिन के यहां के प्रवास में समझ में आई, वह यह है कि यदि स्वर्ग जैसी कोई व्यवस्था कहीं विकसित होती है तो वह ऐसी ही होगी।  इस कथन के पीछे कुछ तो मेरे मन मे उत्पन्न श्रद्धा और विश्वास है। परंतु उससे अधिक कई अन्य निरपेक्ष कारण भी है। श्रद्धा और विश्वास कहीं हो जाए तो वह स्थान वैसे ही स्वर्ग हो जाता है। इसलिए श्रद्धा और विश्वास पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है। जहां तक अन्य कारण हैं, उनको मैं बिंदुवार इस प्रकार से समझ पाता हूं:--- 1. अद्वितीय स्वर्गिक वास्तु कला: वास्तुकला और स्थापन इस प्रांगण की हर इमारत को मनुष्य की स्वर्गिक कल्पना से जोड़ता है। हर इमारत मनुष्य की कल्पना म...

भगवान का दिया सब कुछ है (Detailed)

जिंदगी में तभी कुछ होता है जब कोई किसी से टकराता है। पढ़ने को मैंने यह भी पढ़ा है कि अपनी धरती पर जिंदगी जीने लायक हालात भी ब्रह्मांड में किसी बड़ी टक्कर के बाद ही बने है। ऐसे में, अपने से भी बाहर-गाँव से आया अपना एक भाई टकरा गया। पूछने लगा कि मुम्बई में कैसा चल रहा है बाबा। अब उनको बताना ही पड़ा, आप लोग भी सुन लो। अपुन की जिंदगी की फिल्म में ड्रामा है, एक्शन है, कॉमेडी है, ट्रेजेडी है; थोड़ा रोमांस भी है। बोले तो, पूरी 70 mm की रील है। आप सब सुनेगा ना तो खुद ही बोल देगा कि सच बोलता है भाऊ, भगवान का दिया सब कुछ है। थोड़ा ऊपर-नीचे, आगे-पीछे, दायें-बायें तो होता ही है ना। उतना संभाल लेने का, बाक़ी भाई लोग, बाक़ी मेरी हालत तो जो है सो ये है:---- लोकल में धक्के हैं, गली में उचक्के हैं, ऑफिस में बॉस है, आती नहीं सांस है लफड़े में सब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है। महंगा बाजार है, बनावटी संसार है 99 का चक्कर है मन पूरा घनचक्कर है समझ ना आता अब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है। बढ़ता जाता कर (टैक्स) है फँसता जाता मुम्बईकर है बाहर भीड़ का रेला है भीतर मन अकेला है होता नहीं अब कुछ है, लेकि...