मास्क के पीछे की दुनिया
गाड़ी से चलते चलते मैं गलती से वन वे आया वहां खड़ा ट्रैफिक इंस्पेक्टर मुझपर बिल्कुल न झल्लाया, बोला कि भाई साहब, आप गलत आ गए हैं। तो मैं घबराया कड़ी धूप में राशन लाने थैला ले मै घर से निकला। उसी धूप में पीछे से कॉरपोरेटर दौड़ के आया, बोला कि क्यों परेशान है, भाई साहब, राशन घर आ जाएगा। तो मैं सकुचाया ग्राहकों की लंबी कतार-मेरा नम्बर लंच में आया देखके मुझको बैंक का अफसर हल्की सी मुस्कान ले आया, बोला कि न परेशान हो समय आपका और न लूंगा, तो मैं अचकचाया इसी झोंक में कुछ मैं ऐठां, सरकारी बस में जा बैठा कंडक्टर उठ के नही आया, मैं उसपर थोड़ा गुर्राया इसपर वो इतना चिल्लाया, थोड़ा सा भी रहम न खाया उठकर टिकट कटाके जाओ वरना बस से बाहर जाओ क्या रहस्य यह कैसी माया अब मुझको कुछ समझ न आया बाबाजी की शरण में आया उन्होंने मुझको राज बताया स्वार्थ भरी इस दुनिया मे, नादान कहाँ से आया है! आँख खोल-अब समझा कर, जो कुछ होता वो माया है सद्भावना सप्ताह में, चुनाव जब हो राह में काले कौवे को हंस बना देते है लोग एक चेहरे पर, कई चेहरे लगा लेते है लोग कई धज में, कई रंग में नज़र आते है लोग चेहरे पर अब मास्क लगाते है लोग असली ...