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"अफ़साना-ए-हक़ीक़त"

वक़्त और बेवक़्त के साँचे तो दुनियावी है, अल्पना में हर रंग उसकी तासीर का ही होगा।। बेवक़्त के अंधड़ से बेनूरी सी तो छायेगी पर खुशबू से तेरी, गुलशन ये, शादाब रहेगा।। हर एक मुसाफि...