भगवान का दिया सब कुछ है (Detailed)
जिंदगी में तभी कुछ होता है जब कोई किसी से टकराता है। पढ़ने को मैंने यह भी पढ़ा है कि अपनी धरती पर जिंदगी जीने लायक हालात भी ब्रह्मांड में किसी बड़ी टक्कर के बाद ही बने है।
ऐसे में, अपने से भी बाहर-गाँव से आया अपना एक भाई टकरा गया। पूछने लगा कि मुम्बई में कैसा चल रहा है बाबा। अब उनको बताना ही पड़ा, आप लोग भी सुन लो। अपुन की जिंदगी की फिल्म में ड्रामा है, एक्शन है, कॉमेडी है, ट्रेजेडी है; थोड़ा रोमांस भी है। बोले तो, पूरी 70 mm की रील है। आप सब सुनेगा ना तो खुद ही बोल देगा कि सच बोलता है भाऊ, भगवान का दिया सब कुछ है। थोड़ा ऊपर-नीचे, आगे-पीछे, दायें-बायें तो होता ही है ना। उतना संभाल लेने का, बाक़ी भाई लोग, बाक़ी मेरी हालत तो जो है सो ये है:----
लोकल में धक्के हैं,
गली में उचक्के हैं,
ऑफिस में बॉस है,
आती नहीं सांस है
लफड़े में सब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
महंगा बाजार है,
बनावटी संसार है
99 का चक्कर है
मन पूरा घनचक्कर है
समझ ना आता अब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
बढ़ता जाता कर (टैक्स) है
फँसता जाता मुम्बईकर है
बाहर भीड़ का रेला है
भीतर मन अकेला है
होता नहीं अब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
मेरा इतना सुनने के बाद, भाई को जैसे चक्कर सा आ गया। लगा कि काबू के बाहर जा रेला है। संभलने को ही नही आ रहा है। बड़बड़ाने लगा- सब कुछ है, सब कुछ है, हल्दीराम की भुजिया है क्या!!!! सब कुछ है, सब कुछ है। बोला कि------
तू कैसा इंसान है
बातों का भगवान है
बातें तेरी बता रही
कुछ तो हेर-फेर है
तुकबंदी में बात क्या कह दी
समझे ग़ालिब-फ़ैज़ है!!
जंगल का राजा मत बन
सर्कस का शेर है
अब ये तो साफ साफ है
शंका नही अब कुछ है
उलझनों से घिरा हुआ
लगता तेरा सब कुछ है
फिर कैसे तू कह देता है कि भगवान का दिया सब कुछ है।
अब उसको हनुमानजी के माफ़िक सीना चीर के दिखाना पड़ा मेरे को। बोला मैंने, मुम्बईकर के जिंदगी के जोश को तू क्या समझेगा भाई। यहाँ धमाके में अपनी लोकल के डब्बे उड़ा दिए लेकिन अपन लोंगो के जोश और जुनून को नही उड़ा पाए। अगले दिन भी अपन लोग पूरी धमक के साथ लोकल में खड़े थे। समझाया मैंने उसको----
सीने में सांस है
मन में एक आस है
चल रहा दिमाग है
हाथ पैर आबाद है।
मेहनत अपनी पूँजी है
यारों का साथ है
जिंदगी रुकती नहीं
चलने में विश्वास है।
अपने ऊपर, उसकी रहमत है और ये ही सबकुछ है। इसलिये फिर कहता हूँ कि भाई मेरे, यहाँ ट्रेजेडी में भी कॉमेडी है, रोमांस में भी संस्कार है, करते नही बनता- पर करने को बहुत कुछ है। इसलिए भगवान का दिया सब कुछ है।
----
प्रियदर्शी प्रतीक
01.08.2022
Comments