विकसित भारत 2047 में
मेरे शब्दों में यदि एक पंक्ति में "विकसित भारत 2047" कैसा हो यह दर्शाना हो तो मैं यह कहूंगा :-
"अतुल्य भारत जिसमें व्यक्ति से व्यक्ति के बीच विद्वेष के सारे आधार नष्ट हो चुके होंगे। व्यक्ति का व्यक्तित्व और कर्म ही उसके उन्नति के आधार होंगे। अच्छी शिक्षा एवं चिकित्सा सेवा प्राप्त करने के लिए उच्च आय वर्ग में शामिल होने की बाध्यता नहीं होगी।"
ऐसा करने के लिए क्या कदम उठाने होंगे विशेष रूप से वह इस प्रकार से है:--
1. गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं के अध्यापन स्तर व विषयों पर इस दृष्टि के साथ नियंत्रण व विनियमन कि एक समय के उपरांत उनका उन्मूलन किया जाना है।
2. माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों की संख्या आबादी की दृष्टि से विनियमित की जाए। ऐसी व्यवस्था बन जाए की एक क्षेत्र के सभी समवय विद्यार्थी एक ही विद्यालय में माध्यमिक स्तर तक अध्ययन करें। माध्यमिक स्तर तक एक साथ एक विद्यालय में अध्ययन करने से उस क्षेत्र विशेष की एक पीढ़ी में परस्पर सामंजस्य व लगाव की भावना पैदा होती है। यह विशेष रूप से विद्वेष को समाप्त करने की कड़ी होगी।
3. सरकार को कर अदा करने वाले व्यक्तियों की इस प्रकार सूची बने की उन्हें जीवन की किसी परिस्थिति विशेष में धन अभाव के कारण चिकित्सा सेवा से वंचित न होना पड़े। इसी प्रकार की सुविधा उनकी संतानों को शिक्षा के उच्च स्तरीय संस्थानों में दी जाए।
4. आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति यदि कोई चिकित्सा सेवा या शिक्षा सेवा प्राप्त करना चाहता हो तो उसे धन भाव की स्थिति में सरकार द्वारा इस आशय पर "श्रम ऋण" दिया जाए कि वह व्यक्ति या उसकी तरफ से जिम्मेदारी लेने वाला कोई व्यक्ति एक निश्चित समय अवधि का या प्रारूप का "श्रमदान" करके उसे रन से मुक्त हो सकता है।
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प्रियदर्शी प्रतीक
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