नुक्कड़ नाटक--ट्रैफिक जाम: छोटी दूरी, बड़ी सोच

ट्रैफिक जाम:
बच्चे गाड़ियों की शक्ल बनाकर खड़े हैं। सब एक दूसरे से  लड़ते भिड़ते आगे पीछे हो रहे हैं। आगे का रास्ता नहीं दिख रहा है। गाड़ियां जोर से हॉर्न बजा रही है। चारों तरफ शोर ही शोर है। गाड़ियों से निकलता धुआं माहौल को और जहरीला बना रहा है।

बच्चे एक साथ:
सुनो सुनो और जागो सब,
पास आओ मत भागो सब,
बातों में है दम - वंदे मातरम,
जीने का ढंग - सिखलाते है हम 
वंदे मातरम - वंदे मातरम

नाटक का दृश्य:-----
एक बच्चा गब्बर सिंह के रूप में: कितनी गाड़ियां है

स्टूडेंट बच्चा: सरदार, सैकड़ों

गब्बर: और बच्चे कितने है??

स्टूडेंट: सरदार, पचास

गब्बर: पचास बच्चों ने स्कूल आने के लिए इतना शोर मचा रखा है
कितनी दूर है स्कूल?

स्टूडेंट: सरदार, 3 किलो मीटर

गब्बर: तीन किलोमीटर जानें के लिए तीन सौ गाड़ियों का जाम, इतना शोर और इतनी परेशानी
बहुत नाइंसाफी है!!!!!!!
क्या मिलता है, गाड़ी से स्कूल आकर

स्टूडेंट: रोते हुए...रोज पापा की डांट, स्कूल लेट होने का डर, और ढेर सारी टेंशन

गब्बर: गुस्से में....इतना शोर और इतना पॉल्यूशन क्या तुम्हारे दोस्त गिनाएंगे

स्टूडेंट: जोर से रोते हुए....वो भी मिलता है लेकिन उसको गिनाने के लिए दोस्त है ही नहीं...buhuhu

गब्बर: ऐसे में तेरा क्या होगा कालिया!!!

स्टूडेंट: सर में हाथ रखकर जमीन पर बैठते हुए:
गाड़ी ज्यादा हवा कम, (दम घुटने की एक्टिंग के साथ) बताओ अब क्या ही बनेंगे हम!!!!

गब्बर: धिक्कार है....हमारे जमाने में हम सारे दोस्त पचास पचास कोस से साइकिल चलाकर साथ स्कूल जाते थे, ये दोस्ती वाला गाना गाते थे, एक दूसरे का साथ निभाते थे...और हमारे बाप लोग तो नदी भी तैरकरके जाते थे...

स्टूडेंट: हमने तो सुना कि आप घोड़ा चलाते थे!!!

रहीम चाचा के रूप में बच्चा (उसी स्टाइल में): तो क्या हुआ जो घोड़ा चलाते थे या साइकिल....सारे गांव के बच्चे मिलकर साथ पढ़ने जाते थे, दोस्ती के साथ साथ स्वस्थ शरीर भी बनाते थे, पर्यावरण को बचाते थे और टेंशन को तो कोसों दूर भगा देते थे।

गाड़ी से निकलते हुए बसंती की स्टाइल में स्टूडेंट: ये तो वही बात हो गयी ना, आम के आम और गुठलियों के दाम

सभी बच्चे एक साथ: तो अब से हम सब भी प्रदूषण मुक्त दुनिया की ओर कदम बढ़ाएंगे.....साइकिल से स्कूल जानेंगे और दोस्ती के मजे भी उठाएंगे...सब ताली बजाते है

सुनो सुनो और जागो सब,
मेहनत से ना भागों सब
साइकिल का है दम - स्वच्छ पर्यावरण 
टेंशन हो ख़तम - वंदे मातरम,
जीने का ढंग - सिखलाते है हम 
वंदे मातरम - वंदे मातरम

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प्रियदर्शी प्रतीक 
16.11.2025
डुमरांव, बक्सर

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