भारत का संविधान
स्वतंत्रता, समता और भ्रातृत्व का आलम्बन
संविधान की उद्देशिका, संविधान का दर्पण।।
गरिमामय जीवन, स्वतंत्रता, समता के आधार
संविधान के प्राण है, सभी मूल अधिकार।।
शासन की संकल्पना में, जन हित का है महत्व
सु-शासन निश्चित करें, राज्य के नीति निर्देशक तत्व।।
कैसा जीवन हम जिये, कैसे हो आदर्श
जीवन दर्शन अभिरंजित, करते मूल कर्तव्य।।
राष्ट्रपति- उपराष्ट्रपति, मंत्रिपरिषद के अधिकारी
लोकतंत्र को पोषित करती, संसदीय प्रणाली।।
राष्ट्र जीवन दर्शन में मण्डित न्याय अट्टालिका
न्याय स्थापन हेतु सृजित, संघ की न्यायपालिका।।
राज्यपाल व विधान मंडल का करता है अवधान
उच्च न्यायालय उन्मेष हित, उपस्थित प्रावधान।।
संघ राज्यक्षेत्र, पंचायत, नगरपालिका व सोसाइटी
शक्तियों के विकेंद्रीकरण की जनहितकारी प्रस्तुति।।
सुगम प्रशासन निर्णयन, शक्तियों का प्रबंध
विसंगतियों के निराकरण हित केंद्र- राज्य संबंध।।
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
संविधान के उपवन में है राजभाषा के फूल।।
संकट में हो प्रजातंत्र, हुई विकट परिस्थिति उत्पन्न
राष्ट्र धर्म के अनुपालन हित, हैं आपात उपबंध।।
भारत और भारतीयता के जीवन दर्शन का योग
जीवन सार्थक कर रहे, हम भारत के लोग।।
जन-गण-मन की चेतना का, करता है आह्वान
भारत वर्ष की शान है, भारत का संविधान।।
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प्रियदर्शी प्रतीक
26.11.2021
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