नव आयाम

Dedicated to Friends at Academy

कैसे कटेगा वक़्त, कैसे मिलेंगे लोग
हम सोच ही रहे थे कि आप आ गयी।।

बरसों-बरस के साथ की उम्मीद भर गयी
प्याले की गर्म चाय, मन को गुनगुना गयी।।

अनजान से मिले थे, कब दोस्त बन गये
सुनने-समझने-जानने तक बात आ गयी।।

अभी तो ढ़ल रहे थे, नई जिंदगी में हम
कि दोस्तों से जुदा होने की शाम आ गयी।।

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प्रियदर्शी प्रतीक
05.12.2021
पटना


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