श्रद्धांजलि: उड़न सिख की याद में
"उड़न सिख मिल्खा सिंह" 80 और 90 के दशक में, रोजमर्रा, आम लोगों की बोलचाल में खेल की दुनिया की शख्सियतों में क्रिकेट के अलावा जिन कुछ चुनिंदा महारथियों का नाम आता था उनमे से एक थे मिल्खा सिंह। सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर की मिसालों के अलावा मिल्खा सिंह वो शख्शियत थी जिनका नाम लेकर मिसाल दी जाती कि ये देखो ये मिल्खा सिंह की तरह दौड़ता है।
आज "उड़न सिख" हमें छोड़कर जीवन की अंतिम व निश्चित दौड़ पूरी करने निकल गए है। उनको श्रद्धांजलि देने के क्रम में जब मैं उनके बारे में सोचता हूँ तो पाता हूँ कि मिल्खा सिंह का जीवन, उनकी सफलता सिर्फ इस कारण महत्वपूर्ण नही है कि उन्होने उस दौर में विश्व पटल पर खेल के मैदान पर भारत को पहचान दिलवायी जब हम संसाधन, सुविधा और आधारभूत संरचना के स्तर पर विश्व की शक्तियों के सामने पिछड़े नज़र आते थे। बल्कि इस कारण से भी उनका जीवन प्रशंसनीय, अनुकरणीय है कि जीवन की प्रतिकूलता, झंझावात व दुःखों को उन्होंने अपनी शक्ति बनाया। सफलता, श्रेष्ठता और सराहना मिलने के बाद भी वो जीवन भर अपनी सहजता, सरलता और सौहार्दपूर्ण व्यक्तित्व को बनाये रख सकने में कामयाब हुए।
साधारण से असाधारण की उड़ान भरने वाले "उड़न सिख" का जीवन और "अनुशासन, कड़ी मेहनत और इच्छा शक्ति" का मंत्र सदैव लोगों को प्रेरणा देता रहेगा।
ईश्वर उन्हें मोक्ष प्रदान करें।
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प्रियदर्शी प्रतीक
19.06.2021
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