जो आहों में असर होता

लॉक डाउन न हुआ होता
मैं अपने घर गया होता।

डर कानून का होता
अपराध कम हुआ होता।।

प्रकृति से प्रेम गर होता
प्रदूषण ना किया होता।।

मौत का डर नही होता
तो घर में बंद ना होता।।

इंसानियत सोच में होती
कोरोना ना बना होता।।

जो आहों में असर होता
शी जिनपिंग मर गया होता।।

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प्रियदर्शी प्रतीक
22.05.2020
दलसिंहसराय, समस्तीपुरम

Comments

अगर आहो में असर होता
शी जिंगपिग मर गया होता ||

सुन्दर व्यंग
Unknown said…
बहुत सुंदर

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