कोरोना डायरी 22 मार्च 2020

कोरोना की विश्वव्यापि दहशत को धता बताते हुए, हमलोग मोदीजी की कॉल पर अपने सरकारी आवास की छत पर थाली और ताली पीट कर खुद को जिम्मेदार नागरिक और जिम्मेदार सरकारी सेवक समझ कर गौरान्वित और खुश हो रहे थे। तभी खबर वायरल हुई कि पूरे बिहार को लॉक डाउन कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के कई जिले लॉक डाउन किये जा चुके है। यात्री ट्रेनें पहले ही बंद हो चुकी थी।

लॉक डाउन शब्द कुछ दिनों से रोज सुन पढ़ रहे थे और सदोष अवरोध और सदोष परिरोध (Wrongful Restraint & Wrongful Confinement) की जानकारी लॉ स्कूल (BHU में Law Faculty को Law School कहते है) के दिनों से थी। लेकिन कसम से एक झटके में कॉन्सेप्ट क्लियर हो गया कि लॉक डाउन क्या चीज़ होती है और क्यों भारतीय दंड संहिता में सदोष अवरोध और सदोष परिरोध को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

परिवार और अपने गाँव-देश से लगाव का अंदाज़ा ऐसे ही वक्त होता है जब आप उनसे दूर होते है। बनारसी तबियत ऐसी बंदिशों में और कुलांचे मारती है। फ़िलवक्त, तमाम बेचैनी को परे हटाकर मन को शान्त रखकर ही अपने व्यक्तिगत और सेवा धर्म का निर्वहन किया जा सकता है। न्यायालय में अवकाश घोषित नही है परंतु बार एसोसिएशन ने 31 मार्च तक कार्य स्थगन कर रखा है। वक्त की नज़ाकत को भाँपते हुए पूरा महकमा आपातकालीन सेवाओं के लिये मन ही मन तैयार है।

बिहार राज्य में न्यायालय प्रातःकालीन कर दिए गए है, इसके बाद कोरोना के प्रभाव से, बार के कार्य स्थगन से काम का दबाव बहुत कम है। सेवा में नवांगतुक के तौर पर कोरोना ने एक मौका दिया है कि तफसील से बैठकर मनन किया जाए, पढा जाये और अपने उच्चाधिकारियों के सत्संग से न्यायालय की कार्यप्रणाली, मुक़दमे की बारीकियां, रोज-मर्रा के काम के दबाव को झेलते हुए न्याय के सिद्धान्तों को लागू करने की जिजीविषा को बनाये रखने का मंत्र प्राप्त किया जाये।

वैसे तो समस्तीपुर के दलसिंहसराय अनुमंडल में प्रदूषण उस रूप में नही है जैसे महानगरों में होता है। फिर भी लगता है लॉक डाउन का ही असर है कि तितलियाँ उड़ती हुई दिख रही है, पक्षियों के झुंड और उनके कलरव सुनाई दे रहे है, हवा सुहानी है।

अमरोही साहब याद आ रहे है, लगता कि मोबाइल को परे हटाकर किसी सरहद की बंदिश से आज़ाद पंछी को कह दे कि जाओ संदेशा दे दो:-


"कहना के रुत जवा है और हम तरस रहे है

काली घटा के साए, बिरहन को डस रहे है

डर है ना मार डाले, "कोरोना" का क्या ठिकाना"

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प्रियदर्शी प्रतीक



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