आज की मुरली दिनांक 25.06.2022

आज की ज्ञान चर्चा में, ब्रह्मा बाबा कहते हैं कि सच्चे बाप को सब हिसाब किताब सही सही बताते रहो और श्रीमत लेते रहो। इसी में तुम्हारा कल्याण है। गुरुश्री समझाती हैं कि सच्चे बाप अर्थात परमात्मा को सब हिसाब सही-सही देने का मतलब यह है कि मन के अंधेरे में कोई बात छुपा कर नहीं रखनी है। किसी भी तरह का विकार अगर आ जाता है तो उसको सीधे परमपिता को बता देना है। वह समझाती हैं कि श्रीमत लेने का मतलब है, जब कभी किसी बात पर उलझन महसूस हो, ज्ञान मार्ग पर चलते हुए मन में भटकाव हो, किसी परिस्थिति में क्या उचित निर्णय रहेगा बुद्धि वह निर्णय नहीं कर पा रही हो; तो ऐसे में सीधे-सीधे सारी बात परमात्मा को बता कर उनसे श्रीमत लेनी चाहिए।

गुरुश्री कहती हैं कि यह श्रीमत बाबा की मुरली में भी अनायास ही मिल जाती है। मैंने भी यह महसूस किया की कभी कोई समस्या या विचार मन में उलझन उत्पन्न किया तो आने वाले दिनों की मुरली में उसके जवाब या उचित हिंट मिल ही गए। 

गुरुश्री आगे कहती हैं कि निश्चयात्मक बुद्धि का होना और तन मन धन से ईश्वर को समर्पित होना, परमात्मा की प्राप्ति की दिशा में प्रथम चरण है। गुरु श्री समझाती हैं कि निश्चयात्मक बुद्धि इसलिए आवश्यक है क्योंकि किसी भी यज्ञ में विघ्न तो आते ही रहते हैं। माया भी हर तरफ से लपेटने का प्रयास करती है। माया के प्रभाव में मन में खींचतान होना स्वाभाविक है। ऐसा भी हुआ है कि कई वर्षों तक समर्पित हो सेवा में लगे रहने के बावजूद माया के तूफान में लोगों के कदम डगमगा गए हैं। ऐसे में निश्चयात्मक बुद्धि मन के भटकाव को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। तन मन धन से पूर्ण समर्पण हमें किसी भी भटकाव से बचाता है।

मुझे लगता है विज्ञान ज्ञान को समझ लेने के बाद निश्चयात्मक बुद्धि उस आसन पर विराजती है जहां से वह मन में उत्पन्न होने वाले किसी भी विकार को पहचान लेती है। पहचान ही अत्यंत आवश्यक चरण है। पहचान हो जाने के बाद निवारण करना बहुत मुश्किल काम नहीं रह जाता होगा। "अरे शिव की याद रहेगी तब आँखों में समाया होगा, हम धन्य तभी बन पायेंगे जब ऐसा प्रिय जीवन होगा"

!!ॐ शांति!!

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प्रियदर्शी प्रतीक
25.06.2022

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