भगवान का दिया सबकुछ है
लोकल में धक्के हैं,
गली में उचक्के हैं,
ऑफिस में बॉस है,
आती नहीं सांस है
लफड़े में सब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
महंगा बाजार है,
बनावटी संसार है
99 का चक्कर है
मन पूरा घनचक्कर है
समझ ना आता अब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
बढ़ता जाता टैक्स है
मन होता नहीं रिलैक्स है
बाहर भीड़ का रेला है
भीतर मन अकेला है
होता नहीं अब कुछ है, लेकिन भगवान का दिया सब कुछ है।
कैसा तू इंसान है
कितना तू कंपलेक्स है
प्रॉब्लम से ही घिरा हुआ
लगता तेरा सब कुछ है
फिर कैसे तू कह देता है कि भगवान का दिया सब कुछ है।
सीने में सांस है
मन में विश्वास है
चल रहा दिमाग है
हाथ पैर आबाद है
उसकी रहमत ही सबकुछ है, इसलिये कहता हूँ कि भगवान का दिया सब कुछ है।
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प्रियदर्शी प्रतीक
24.07.2022
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