आज की मुरली 20.07.2022
आज की ज्ञान वार्ता में बाबा कहते हैं कि बच्चों को तुम रूहानी से ना हो और तुम्हारे अलावा सारे विश्व की रावण से रक्षा कोई नहीं कर सकता। तुम्हें एक शुद्ध नशे में रहना है।
गुरुश्री समझाती हैं कि रावण अर्थात पांच विकार जो मनुष्य को कमजोर करते हैं, उनसे मुक्त होकर, हम जो आदर्श विश्व के सामने उपस्थित करते हैं। वही आदर्श रूप, वह शक्ति है, वह स्वरूप है, जो विश्व को प्रेरणा देता है। और हमें शुद्ध नशे में रहने का अर्थ है हमें इस बात पर शुद्ध अभिमान होना चाहिए कि हम यह महान कार्य कर रहे हैं। जिस प्रकार से हम पांचों विकारों को हराकर अपने को एक आदर्श रूप में स्थापित कर रहे हैं। यह सिर्फ हमारे अपने लिए नहीं है। या हम संपूर्ण विश्व के रक्षणार्थ कर रहे हैं।
मुझे लगता है जब हम अपने स्वरूप में आ रहे इस परिवर्तन को, इस नजरिए से देखना प्रारंभ कर देंगे। तो और कोई कारण नहीं होगा कि हम अपने स्वरूप से डगमगाए या विरत हो। और यह प्रक्रिया सतत चलती रहेगी। मुझे लगता है कि विश्व की रक्षा करने की बात कहने से तात्पर्य है कि विश्व जो तमाम तरह की उलझन में फंसा हुआ है। मानव जाति, मानव समाज जिस तरह की परेशानियों को महसूस करता है, झेलता है, वह हमेशा उस रास्ते की खोज में रहता है जिस रास्ते से उसे शांति प्राप्त हो सके। ऐसे में हम जब दुनिया के सामने एक आदर्श रूप रखते हैं तो यह दुनिया के रक्षार्थ ही होता है।
बाद में बाबा यह भी कहते हैं कि तुम एक रूहानी सेना हो, तुम तो गुप्त सेना हो और तुम्हारी लड़ाई गुप्त है। इसका अर्थ मैं यह समझता हूं कि यह कोई ऐसी सेना नहीं है जो अंदर अंदर किसी मुहिम को लेकर अपनी तैयारी कर रही है। यह इसलिए गुप्त है क्योंकि हम अपनी लड़ाई अपने अंदर लड़ रह हैं। यह हमारी लड़ाई हमारे अपने से हैं, हमारे विकारों से हैं। तो यह लड़ाई हमारे अंदर चलती है, हमारे मन में चलती है। इसलिए यह गुप्त है। परंतु इस लड़ाई में सफल होने पर व्यक्ति में जो परिवर्तन आते हैं वह बाहर की दुनिया में परिलक्षित होते हैं। इस लड़ाई में सफलता का असर दुनिया को दिखाई पड़ता है। लोग इससे प्रभावित होते हैं, अनुकरण करते हैं। और यह धीरे-धीरे फैलने लगती है, लड़ाई का असर दिखने लगता है। रावण राज्य समाप्ति की ओर होता है और सुख के रामराज्य के स्थापन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
!!ॐ शांति!!
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प्रियदर्शी प्रतीक
20.07.2022
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