अधूरे ख़्वाब

कितनी अधूरी चाहत, मन में दबी हुई है
मन की गिरह में कितनी गांठें पड़ी हुई है!!

चलते हुए डगर में, हम दूर निकल आए
राहों में हर एक पग की, छापे पड़ी हुई है!!

मिला दोस्तो का साथ वर्षों बरस के बाद
जाना के दिल की कोठरी में यादें पड़ी हुई है!! 

प्यार की वो ख्वाहिश अधूरी क्यों रह गयी
इज़हार की तमन्ना दिल में पड़ी हुई है!!

अधूरे ख़्वाब, अधूरी बात, अधूरी कहानियां है
मलमल की चादरों पर सिलवट पड़ी हुई है!!

ऐ काश ऐसा होता, ऐ काश वैसा होता
यही सोचने में उसकी नींदें उड़ी हुई है!!

मुड़ कर कभी जो देखा, वो ज़ार ज़ार रोया
महफ़िल में उसके होंठ पर चुप्पी पड़ी हुई है!!

इतना सुकून ही बस जीने को होगा काफ़ी
यादों में उसकी, मेरी यादें जुड़ी हुई है!!

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प्रियदर्शी प्रतीक 
डुमरांव
09.05.2026

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