एक भगीरथ और गया
एक भगीरथ और गया
तुम गंगा गंगा करते थे
हम तुम पर श्रद्धा रखते थे
सत्ता की दलदल ऐसी थी
तन डूब गया, मन डूब गया
एक भगीरथ और गया
गंगा को माता कहते थे
गंगा से जीवन दर्शन था
नव दर्शन स्थापित करने में
क्या याद रहा, सब भूल गया
एक भगीरथ और गया
जीवन की यह परिपाटी है
शिखरों पर चढ़ने के ठीक बाद
रपटीली राहें आती है
ऊपर को उठे, लो मूल गया
एक भगीरथ और गया
आध्यत्मिकता का सुखद सदन
पश्चिमीकरण का नव लेपन
सब कुछ डग-मग, सब गड्ड-मड्ड
तुम आँख मूंद कर खड़े रहे
वह चला गया, वह चला गया
एक भगीरथ और गया
------प्रियदर्शी प्रतीक
(गंगा नदी से संबंधित प्रश्नों को लेकर अनशन के दौरान प्रोफेसर जी डी अग्रवाल के निधन पर)
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