आज़ादी का अमृत-महोत्सव: निहितार्थ

बरसों से सुषुप्त राष्ट्र की संस्थापना कराने का।
दिन आया था विश्व पटल पर भारत के जग जाने का।।

अगणित वीर शहीदों का, राष्ट्र भक्त मतवालों का,
स्वप्न हुआ था पूर्ण, देश हित जीने मरने वालों का।।

लड़ स्वराज का युद्ध, सु-राज हित अलख जगाने वालो का,
दिन आया था, आज़ादी पर प्राण गँवाने वालो का।।

भारतवर्ष की जागृति का, नवोन्मेष के उत्सव का।
वर्ष है राष्ट्र की आजादी के, सुखद अमृत-महोत्सव का।।

स्वतंत्र राष्ट्र से जुड़े हुए उन सपनों का, संघर्षों का,
क्या खोया-क्या पाया, लेखा करो पचहत्तर वर्षों का।।

शस्त्र-शास्त्र का अमित समन्वय, सत्य-अहिंसा-त्याग
इंद्रधनुष के रंगों सा है, भारत का इतिहास।।

अलग अलग टुकड़े औ रियासत, बंटा हुआ था राज्य,
जागे हम, बनने को संप्रभु-लोकतांत्रिक-गणराज्य।।

विश्व पटल पर सुदृढ़ रूप का, सपना देखा हमने,
रियासतों का विलय कराया, देश के लौह पुरुष ने।।

उद्योग-धंधे और कल-कारखाने, रखते विकास की नींव
आर्थिक स्वायत्तता हेतु बो दिया औद्योगिक-क्रांति का बीज।।

सीमायें सुरक्षित हो अपनी, कहीं भूख का न हो निशान,
आन्दोलित राष्ट्र की आवाज़ थी, "जय जवान-जय किसान"।।

खाद्य सुरक्षा अहम प्रश्न था, देश की आजादी के बाद
हरित-श्वेत और नील क्रांति का है स्वर्णिम इतिहास।।

शांतिपूर्ण जीवन धारा हो, राष्ट्र अखंडता रहे सुनिश्चित,
हेलिकॉप्टर-टैंक-विमान-मिसाइल से सेना हुई सुसज्जित।।

विश्व शक्तियाँ टकरायी, हुआ पंचशील पर घात
शांति सुनिश्चित करने को किया अणु-ऊर्जा का विकास।।

सँपेरों का देश बुलाकर, पश्चिम ने किया बहुत उपहास
उन्ही जगहों पर जमी, भारतीय श्रम-मेधा की धाक।।

वैश्विक शोध-समीक्षा ने, हमे Third World(तीसरा विश्व) ठहराया,
सबकी सोच को धता बताकर, चंद्र औ मंगलयान उड़ाया।।

अप्रतिम न्यारी छवि देश की, सुंदरता कण-कण में समायी
इस धरती की बाला, विश्व औ ब्रह्मांड सुंदरी बन आयी।।

जब संसाधन की उन्नति, मिली देशज प्रतिभा के साथ,
किसी खेल में नही रहे हम, परिचय के मोहताज।।

हो क्रिकेट, निशानेबाजी, टेनिस, या बॉक्सिंग, कुश्ती, हॉकी
ओलंपिक-विश्वकप-राष्ट्रमंडल की, रही न ट्रॉफी कोई बाकी।।

जब हो राष्ट्र उन्नति, प्रगति, चेतना, समृद्धि की बात,
श्रेष्ठता की प्रतिमूर्ति है, पचहत्तर वर्षों का इतिहास।।

फिर भी काम बहुत बाकी है, अभी बहुत है चलना,
राष्ट्र प्रगति हित, राष्ट्र प्रेम में, सबका रचना बसना।।

राष्ट्र जागृति का अवसर, तब ही उत्सव बन पाएगा
कतार का अंतिम व्यक्ति, जब खुद को शामिल पायेगा।।

जब प्रगति की गागर का अमृत, जन-जन पर उड़ेला जायेगा
सब साथ बढ़ेंगे मिल-जुलकर, "भारत" विश्व-गुरु बन जायेगा।।

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प्रियदर्शी प्रतीक
22.12.2022


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