आज का विचार 16.12.2022

आज का विचार
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"लेखक यदि दूसरों की स्थापनाओं को ज्यो का त्यों सही न मानकर, स्वयं ही ज्ञान के मूल-स्त्रोतों पर पहुँचने की कोशिश करें तो सत्य उन्हें अधिक स्पष्ट होकर दिखाई पड़ेगा और वे ऐसी बहुत सी गलत बातों को दुहराने से बच जाएंगे जो सिर्फ गलत हैं।"

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"संस्कृति के चार अध्याय"
रामधारी सिंह दिनकर

यह विचार आज के सोशल मीडिया के दौर में और भी प्रासंगिक हो जाता है। इससे विधि के क्षेत्र में कार्यरत लोग हमेशा दो-चार होते रहते है। बहुधा ऐसे अनुभव होते है कि जिस  प्रक्रिया अथवा नियम का पालन परंपरागत होता आ रहा है, वह मूल स्रोत से तुलनात्मक रूप से एकरूपता नहीं रखता।

इस संदर्भ में, विधिक बिंदु पर समाचार चैनलों पर किया जा रहा विश्लेषण, विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है। जैसे:- न्यायालय की सामान्य प्रक्रिया का हौवा बनाकर पेश करना, साक्ष्य का विश्लेषण (जो विधि के जानकार व्यक्ति के लिये भी कठिन कार्य है) उसका आंकलन करने निर्णयन करना इत्यादि। मूल स्त्रोतों से अगर उन बातों का मिलान करने का कष्ट उठा लिया जाए तो विमर्श बदला हुआ होगा।

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प्रियदर्शी प्रतीक
16.12.2022

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