तेरा साया

तेरा साया


मैंने नहीं समझा
या कहूं जान नहीं पाया
कैसे दूर खींचता गया
दामन  से तेरा साया

इंसान को समझना
मुश्किलातों का सफर है
फिर ऊपरी चमक दमक
और तहज़ीब की माया

बढ़ती उमर के साथ ही
बढ़ती समझ रखाती है
चाहत के जख्मों  पर
उमीदों का फाया

सब कुछ बेजार सा
बेकार सा होने को था
मैं टूटने वाला था कि
तेरी यादों  ने बहलाया।। 

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