"छींको फूट गयो"
"छींको फूट गयो"
शेर की खाल
दे रगड़ उतारी
बेल-बूट सब छूट गयो
बिल्ली बन
खिड़की से कूदे
लेकिन छींको फूट गयो।।
आधी छोड़, पूरी को धावे
आधी नही, न पूरी पावे
सीख- सिखावन
बड़ बुजुर्ग की
जानबूझकर भूल गयो
सत्ता के माखन का लालच
हीत-मीत सब शूल भयो
उछल-उछल के
गाल बजायो
लेकिन छींकों फूट गयो।
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प्रियदर्शी प्रतीक
Disclaimer:- इसका वर्तमान महाराष्ट्र की राजनीति से कोई संबंध नही है।
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