गज़ल

दुनिया की रवायत से इनकार नही करते,
इसरार बहुत करते है, इक़रार नहीं करते।

बातों में बना रखते है भरम दुनिया-भर का
पूछो तो ये कहते कि सरोकार नही रखते।

महफ़िल में बैठ नजरों से बातें किया करे
शुबहे में है जमाना, वो बात नही करते।

मुस्कुराहट से छुपा लेते है सीने में दफ़न राज,
ताज्जुब हुआ कि क्या वो जज़्बात नही रखते।

उन सुरमई नयनों की कोई क्या मिसाल दे,
वो है खफ़ा तारीफ़ में क्यों कुछ नहीं कहते।

दुनिया की हक़ीक़त से हुये रूबरू सनम
वाद-ए-वफ़ा पे अब यूहीं ऐतबार नहीं करते।

-----
प्रियदर्शी प्रतीक
15.10.2020



Comments

Popular posts from this blog

भीड़ चीखती और भीड़ चिल्लाती जाती

Budhha: Some thoughts on his Sculpture at Sanchi

Ecstasy of Blissfulness: Sadhguru