छल का अन्नानास
{सोचा समझा छल था, हुआ ना ये अनायास था}
{बारूद ही था परोसा, बस शक्ल से अन्नानास था}
(1) पाशविकता का विशेषण हमने जना है
मानवीयता को अलंकृत कर रखा है
मृत्यु भय, ममता से कातर एक पशु ने
उच्चतम आदर्श का परिचय दिया है।।
आत्म रक्षा, मृत्यु भय हमने सुना है
आत्म रक्षार्थ वध को श्रेयस्कर चुना है
निरपराध ने शांत रह बलिदान देकर
चेतना के उच्च श्रृंगों को छुआ है।।
(2) शीश मानवता का नही झुका होता
मानव नजर खुद से न चुरा रहा होता
सोच सकता कि बनेगा एक "सभ्य समाज"
गर दोस्त बन उसको नही छला होता।।
आत्माओं आज फिर धरती पर आओ
देख लो, संवेदना की क्रुरतम हत्या के घाव
आदमी से आदमी का छल हुआ इतिहास है
दया, प्रेम, मानवता का हो रहा परिहास है।।
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प्रियदर्शी प्रतीक
04.06.2020
दलसिंहसराय, समस्तीपुरम
(केरल के मल्लापुरम में 27मई 2020 को एक गर्भवती हथिनी ने नदी के पानी मे खड़े खड़े दम तोड़ दिया। हथिनी 20 माह की गर्भवती थी और भूखी थी। शहर में खाने के लिए घूम रही थी जब उसे किसी ने पटाखों से भरा अन्ननास खिला दिया। हथिनी ने जख्मी होने के बावजूद किसी पर हमला नही किया बल्कि तीन दिन नदी में खड़ी रही।)
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